सोचिए किस किसान का बेटा किसान है! नए दौर की कब बनेगी यहाँ पर पहचान है परिवर्तन को स्वीकार करना होता मुश्किल आंदोलन ख़त्म पर अब भी अधूरी मंज़िल आलू प्याज़ टमाटर सड़कों पर फेंके जाते ग़रीब बेरोज़गार भूख से पीड़ित मर जाते राजनीति में उलझ गई किसानों की कश्तीContinue Reading

खुशबू उर्वरा की हर आँगन महक रही है एक ख़्वाब एक हसरत खूब चहक रही है। सरसों बाजरा ग्वार फली की झूमती डाली चारों ओर दिखती खेत खलिहान हरियाली लहलहाते महकते ख़ुशनुमा चंदन गुलाब मन में उमड़ता खुशियों का भरपूर सैलाब। बैलों की रूणझुण जीवन में जोश बढ़ाती स्वावलंबन भावContinue Reading