प्रेम में क्या हार हो क्या जीत ये परमात्मा का सुमधुर गीत अंतरात्मा को महसूस करना यहीं जगत की है सच्ची रीत जीत से ख़ुशी हो हार से विकल समभाव से जीवन होता सफ़ल हार जीत भुलकर ऊपर उठना कीचड़ में खिल जाता है कमल बस पा लेना ही जीतContinue Reading

बचपन से पचपन के सफ़र में सच्चा मित्र बनकर साथ दिया मेरे दिल में भरे ढेरों सवालों का पल – पल सही तूने जवाब दिया भटके मन की व्यथा को कम कर मन को एकाग्र शांति सुकून दिया कभी मुझे हँसाकर कभी रुलाकर सशक्त शिक्षा प्रेरणा सद्गुण दिया पुस्तक लेContinue Reading

ख़ुशी की झलक कभी अश्कों की छलक प्रेम की ललक कभी अपनेपन की चहक कलम से निकले हर नायाब भावों के रंग ज्ञान के दीप प्रज्वलित नयी चेतना के संग एक ख़्वाब तलवार से पैनी क़लम की धार लेखनी मृत्यु के बाद भी जीवंत करें संसार कलम में सदा रहे Continue Reading