सूरज से दोस्ती 

किरणों ने अब दस्तक दे दी है
चलो सूरज से दोस्ती कर लें
कुछ दिल की बात करनी है 
थोड़ी सी संग गुफ़्तगू कर लें 

स्वागत गीत गाते हो
पवन की अठखेलियों से
हर सुमन महकाते हो
तुम अपनी लालिमा से
लपक झपक दुपहरी में
कभी जवानी की ताप हो
धुंध को बढ़ते देख कर
लुका-छिपी खेलते आप हो।

क्या आप भी डरते हो
कालेपन की खोट से
क्यूँ छिपाते हो मुखड़ा
नर्म बादलों के ओट से
ऊर्जा सबमें भरने वाले
अपनी तपिश में जल जाते हो
जग रोशनी करने वाले
शाम होते ही ढल जाते हो।

"कभी गुरूर न करना जनाब क्योंकि सूरज भी ढ़ल जाता है।"

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