स्पिती वैली की रोमांचक यात्रा का छठा दिन – काजा डे 2

हिमालय की गोद में स्थित देव भूमि हिमाचल प्रदेश के स्पिती वैली की रोमांचक यात्रा का छठा दिन – काजा डे 2
अपने स्पिती के सफ़र की अनुभूति को शब्दों के मोती में पिरो कर आप सब के समक्ष रखने का प्रयास किया है,जो मैंने कल रात मन में तय किया था, वज़ह यही थी कि जो जाना चाहें, वो इसे पढ़ कर निश्चित ही इस गंतव्य पर जाने का मन बनाएंगे और जो लोग किसी भी आर्थिक, शारीरिक और मानसिक दुर्बलता के कारणवश न जा सके, वो इस संस्मरण को पढ़ कर अपने समृद्ध भारत के हिमालय पर स्थित हिमाचल प्रदेश के स्पिती अंचल की सुंदरता को दिल की गहराईयों से महसूस कर सकते हैं। यहाँ आपसे यही कहूँगी कि अगर आपको ये लेखनी, अनुभव, संस्मरण पसंद आ रहा है, तो आप अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दीजियेगा और इसे अधिक से अधिक लोगों तक शेयर कीजिएगा।
एक रात पहले ये समझ लिया था कि कल की तारीख में काजा के किस दर्शनीय स्थल पर जाना है, पता चला कि हिमालय पर्वत पर स्थित विश्व के सबसे ऊँचाई पर बसे जो तीन गांव है, वो देखने के लिए जाएंगे, करीबन समुद्री सतह से 14500 से 15000 हज़ार की ऊँचाई  पर बसे सबसे प्रथम हम लांग्जा गाँव पहुँचे।
नैसर्गिक सौंदर्य का यौवन अपने चरम सीमा पर था, बुद्ध भगवान का पहली बार ऐसा स्मारक देखा, जैसे साक्षात् हिमालय पर्वत पर की ओर मुख रख कर ब्रह्मयोग कर रहा है और  देख कर ऐसा महसूस होता है कि हम भी यहाँ पर ब्रह्म में लीन हो जाए, पावन सर्द हवा का तन को छूकर जाना हमारा रोम-रोम पुलकित हो रहा था।
ऐसा लगने लगा कि कि भोलेनाथ से मिलन हो गया , फिर गोम्पा को देख कर एक भव्य होटल में भी हमने छाया चित्र खिंचवाये।
वहाँ लेमन टी का स्वाद लिया, जो शायद ज़िंदगी का सबसे अनूठा स्वाद था।
यहाँ पूरे स्थल में सफेद चीते जरूर नज़र आते हैं,जैसा हमने सुना था, हालाँकि हमें नहीं देखने को मिले, पर वही पर बने एक मित्र ने फोटो दिखाए, बहुत सारी खुशियों की अद्भुत स्मृति मन में बसा कर आगे निकले कॉमिक गांव की ओर, राष्ट्रीय मार्ग 505 से ही जुड़े हुए इस गांव में जब पहुँचे तो
मोनेस्ट्री में बर्फ बिछी हुई थी, मोंक ने बताया कि दो रात पहले बर्फ बारी हुई थी और रास्ते बंद कर दिए गए थे, आज आप पहुँच गए, ये सौभाग्य की बात है, कठिन यात्राओं में दर्शनीय स्थल कई बार प्राकृतिक आपदा और विपदा के कारण बंद हो जाते हैं, हम ने धरा, प्रकृति, अंबर, सूरज और पहाड़ों को धन्यवाद दिया, कहते इन सभी में परमात्मा का निवास है और पहाड़ों में देवता विराजमान हैं, ऐसा यहाँ के स्थानीय लोग ऐसा कहते हैं, उसके बाद विश्व के सबसे ऊंचे रेस्त्रां में बैठ कर चाय और सैंडविच का लुत्फ उठाया।
घुमावदार रास्तों से होते हुए हम हिक्किम  गाँव की ओर निकल पड़े, गूगल का नेटवर्क भी कई जगह पर नहीं मिलता है, रास्ते कई-कई जगह पर बड़े खराब है, मोड़ बहुत खतरनाक है, इसलिए ध्यान से चलाना बहुत जरूरी है, सिर्फ स्वयँ के लिए ही नहीं सामने वाले वाहन के लिए भी और पाया कि सब में धैर्य और सहयोग की भावना है।
इतने दुर्भर और कठिन मार्ग पर भी मन में ठान लो तो हर रास्ता आसान हो जाता है और फिर पहुँचे ऐसी जगह पर जहां विश्व का सबसे ऊँचा पोस्ट ऑफिस बना हुआ है, देख कर आनंद आ गया
वहाँ पोस्ट कार्ड पर लिखने के लिए भीड़ लगी हुई थी।
सभी अपने प्रिय जनों को चिट्ठियां भेजने के लिए आतुर हो रहे थे।
हिक्किम की सुन्दरता लिए हुए उस पोस्ट कार्ड पर हमने भी अपने रिश्तेदारों को संदेश लिखा और साथ में हमारे भारत देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को काव्य रचना लिख कर चिट्ठी के माध्यम से वही से समर्पित की,वहाँ के डाकिया जी भी मुझसे अति प्रसन्न हो गए कि मोदी जी को यहाँ के बारे में विशेष तौर पर अंकित कर किया जा रहा है एवं अद्भुत आभा की बात पहुंचायी जा रही है, आशा और उम्मीद में एक अलग ही ऊर्जा का सम्मिश्रण है, उन्होंने मुझे अच्छी से अच्छी क़लम देख कर दी।
नए ज़माने के तकनीकी बदलाव कंप्युटर, मोबाइल, इंटेरनेट के संग पुराने ज़माने की पद्धति के पोस्ट कार्ड, पोस्ट ऑफिस को जोड़ कर जीवन के कई मीठे अनुभवों को मन में लेकर वहाँ से निकले
यहाँ आपको महत्वपूर्ण बात बताना चाहूँगी, यहाँ से काजा जाने हेतु दो रास्ते जाते हैं, पहले तीन किलोमीटर कच्चे रास्ते से होकर राष्ट्रीय मार्ग से जुड़ जाना और फिर काजा की ओर लौट जाना और दूसरा रास्ता पूरा कच्चा है,जो 10 किलोमीटर का था और 5 किलोमीटर पक्का रास्ता बना हुआ था, , जिसमें जंगली जानवर खूब दिखाई देते हैं, नील गाय, लोमड़ी सफेद चीते आदि, दुर्गम पहाड़ी एकल रास्तों पर गाड़ी में बैठे रहना और चलाने वाले दोनों की जान पर खतरा बना रहता है, बड़ा रोमांच हुआ, ज़िंदगी का ऐसा रोमांच जो बिरलों को ही मिलता है।
पर एक बात विशेष ध्यान में रखते हुए कि “सावधानी हटी, दुर्घटना घटी” सोच कर हम धीरे-धीरे उतरते गए, ऐसी जगहों पर मोबाइल बिल्कुल नहीं उठाना चाहिए क्योंकि “जान है तो जहान है” पूरे हिमाचल में एक खास बात पाई कि बड़े प्रेरणादायक शानदार स्लोगन लगे हुए हैं, जिसे पढ़ कर सभी का मनोबल बढ़ता है,भोलेनाथ को याद करते हुए हम मुख्य सड़क पर आ गए, शाम हो चली थी, काजा के मुख्य बाजार में प्रवेश लिया,यह इलाका मूलतः मांसाहारी भोजन का है और हम शाकाहारी है, उत्तर भारत राजस्थान से है, सोच ही रहे थे कि क्या खाए, तभी हमारी नजर पड़ी, जो पिछले कई दिनों से नहीं खाने को मिला, पढ़कर तो आपके मुँह में भी पानी भर आया होगा, चलिए क्या खाया, वो आपको बताऊँगी मेरे अगले पोस्ट में।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *