वर्ष 2020,  आज तुम्हारे लिए कुछ लिखने को हृदय प्रेरित हुआ है, सोचती हूँ कहाँ से शुरू करूँ इसे, क्योंकि अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण साल जिसको जीवन की डायरी से कभी भुलाया नहीं जा सकता है।इस कोरोना काल ने सुख दुख दोनों को प्रतिबिंबित किया है। सुख परिवार का जिसे विगतContinue Reading

बस तुम ही तो हो मेरे जीवन के आधार पल पल गति साँसों की प्राणों के सार मेरे सुख दुख के साथी जन्मों का बंधन ऊर्जा नव संचार प्रियतम का आलिंगन बस तुम ही से बना मेरा प्यारा परिवार अनन्त आकाश धरती मिलन  संसार तुमसे मिला प्रेम  अद्भुत दैवीय मिलनContinue Reading

राखों के ढेर से अब भी काले धुएँ निकल रहे हैं जमीं में दफन ख़ामोशी बन दिल में धधक रहे हैं मासूम बेटी को मारकर नाले में जा गिरा दिया धिक्कार दरिंदों का दुष्कर्म  आँचल तार-तार किया। खामोश गहरी आंखे टूटते बिखरते वृद्ध  माता पिता दिल में अथाह पीड़ा जीवनContinue Reading

सर्दियों की शादियां बड़े अनोखे मजे शाल दुशाला सूट पहन खड़े सब सजे। पॉकेट में भर लेते किशमिश काजू बादाम अग्नि समक्ष बैठ कर मिले सबको आराम। गरम-गरम समोसे कचोड़ियां पूरी हलवे ठूंस-ठूंस भर पेट सब खाते मिठाई मेवे। बेशुमार आनंद उमंग नाच जलवे मस्ती रज़ाईयों में घुस कर सबकीContinue Reading

प्रेम सुकून चैन सुख शांति के सपने पूरे हुए ख्वाहिशें अब और नहीं बची जब से तुम मेरे अपने हुए ये कहने को भले ही लगता बड़ा शानदार ख़्वाहिशों के बिन सबकी ज़िंदगी होती बेज़ार रंगीन टीवी पर हमें दिखाई देती खूबसूरत छवि ब्लैक एंड व्हाइट में बेकार जिंदगी केContinue Reading

आज़ाद परिंदों की तरह उड़ान मिले स्वयं का वज़ूद भरपूर सम्मान मिले मानव अधिकारों का हनन ज़ुल्म सितम नए परवाज़ के साथ उठाए जाते कदम राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन अनेकता में एकजुटता परिभाषित प्रबंधन शिक्षा स्वास्थ आर्थिक मूलभूत जीवन सुविधा सुरक्षित माहौल भेदभाव रहित सुंदर विधा अधिकारों काContinue Reading

खुशबू उर्वरा की हर आँगन महक रही है एक ख़्वाब एक हसरत खूब चहक रही है। सरसों बाजरा ग्वार फली की झूमती डाली चारों ओर दिखती खेत खलिहान हरियाली लहलहाते महकते ख़ुशनुमा चंदन गुलाब मन में उमड़ता खुशियों का भरपूर सैलाब। बैलों की रूणझुण जीवन में जोश बढ़ाती स्वावलंबन भावContinue Reading

एक पहल से सुप्रीम कोर्ट को आज एक निवेदन पत्र देश में भारत बंद के आह्वान को हमेशा के लिए समाप्त करने का फैसला लिया जाना चाहिए। 135 करोड़ की जनसंख्या वाला भारत देश है जिसमें कोई भी कारण से कभी भी एक वर्ग समुदाय द्वारा भारत बंद के आह्वानContinue Reading

इक उम्र लगती है जीवन को समझने में रिश्तों को पिरोने में अनुभव को बटोरने में इक उम्र लगती है किनारों को ढूंढने में साहिल से तैरने में हवाओं को रोकने में इक उम्र लगती है शहर को बसने में गाँव को भूलने में बेगानों संग जीने में इक उम्रContinue Reading

वादा है तुझसे ए वतन अपना फ़र्ज़ निभाउंगा तिरंगे की सम्मान में अपना शीश नवाउंगा। दुश्मन आँख उठाए तो चीर के उसको आऊंगा माँ भारती की सुरक्षा में जीवन कुर्बान कर जाऊँगा। जय हिन्द