हिमालय की गोद में हिमाचल प्रदेश के स्पिती वैली की रोमांचक यात्रा – चौथा दिन। नदी और बारिश के शोर को सुनते हुए हम सोने चले गए थे,सुप्त मन में एक चिंता थी कि आसमान खुला होगा कि नहीं क्योंकि मौसम विभाग के अनुसार आगे बर्फ गिरने की संभावना है,Continue Reading

सुप्रभात दोस्तों, हिमालय पर्वत पर स्थित देव भूमि हिमाचल प्रदेश के स्पिती वैली की रोमांचक यात्रा का तीसरा दिन – चितकुल चितकुल की अंधेरी रात में अचानक दो बजे नींद खुल गई तो अपने होटल के कमरे की खिड़की से अचंभित और रोमांचित करने वाला प्राकृतिक दृश्य था,ओस की बूंदेContinue Reading

हिमालय पर्वत पर स्थित देव भूमि हिमाचल प्रदेश के स्पिती वैली की रोमांचक यात्रा का दूसरा दिन –  कुफरी से चितकुल यात्रा का दूसरा दिन,उत्साह, उमंग हृदय में, अनुपम दृश्य प्रकृति का, समय पर निकलना जरूरी था, क्योंकि कुफरी से चितकुल भी रात होने से पहले पहुँचना जरूरी था। हिमाचलContinue Reading

जय माता दी हर-हर महादेव आभार – 1. भारत सरकार 2. हिमाचल प्रदेश गवर्नमेंट 3. पुत्रियां 4. ड्राइवर 5. गूगल हिमालय पर्वत पर स्थित देव भूमि हिमाचल प्रदेश के स्पिती वैली की रोमांचक यात्रा का पहला दिन – गुलाबी नगरी जयपुर से कुफरी गुलाबी नगरी जयपुर से घनघोर बारिश मेंContinue Reading

कुछ  तो कहो ये दीवारें भी अब कहने लगी है  अकेली तन्हा पथराई सिमटी सी रहने लगी है   कितने  बरस  बीते हैं  उसके  आने की आस में  ज़र्र-ज़र्र टूटकर ज़मी पर रोज़ बिखरने लगी है।

धरती माता से है गहरा नाता आओ हम सब सम्मान करे प्रदूषण ख़त्म हो पृथ्वी हित में  स्वच्छ ऊर्जा का आह्वान करे।

सोना उगले अपनी माटी चहुं   ओर खुशहाली   हो वृक्षारोपण हमको  करना     धरा पर सुंदर हरियाली हो। 

रात की तन्हाई बना देती है  मुझे आवारा नापता हूँ मैं शहर की हर गली हर चौबारा रोशनी में  नहाई सड़कें भी  लगे बुझी सी ठोकरें खाता फिरूँ दर-ब-दर मारा-मारा। गुम हूँ आवारगी  में मेरा कोई ठिकाना नहीं बेवफ़ाई  में खाई चोट किसी  ने जाना नहीं कुछ अफ़वाह बेवजह बदनामContinue Reading

कुछ बातें लिखी हुई मेरे मन की, वो पुराने अखबार ले आओ बेपनाह मोहब्बत थी हमें कभी,वो पुराने एतबार ले आओ  यादों में बिखरे हुए कई अनकहे वादे, लफ्ज़ और ज़ज्बात  मेरी दिलकश आँखों में फिर से, वो पुराने खुमार ले आओ।

खाटू के दरबार में, भक्तों की जयकार। महके इत्र गुलाब से, श्याम धणी सरकार।। भक्तों की जयकार से,गूंज उठा दरबार। महके इत्र गुलाब से,कलयुग के दातार।।