मैं भी नारी!

नारी समाज का आभूषण,
नारी देश की शान,
घर को देकर बहुमूल्य सेवा,
बढ़ाती अपनों का सम्मान।
नारी बिना पुरुष अधूरा,
पुरुष बिना अधूरी नारी,
दोनों सम्पूर्ण एक दूजे संग,
हमसफर बन गुजारे जिंदगी सारी।

नारी के मातृत्व रूप पर,
ईश्वर भी बलिहारी जावे,
माँ बनकर जीवन देवे,
सृष्टि में फूल खिलावे।

धरती माँ ए भारत माँ!
दोनों ही है नारी स्वरूप,
भाग्यवान वो ही होगा,
जो निखार पाएगा इनका शक्ति रूप।

रूढ़िवादी बंधनों को तोड़,
नारी का अब अवतार नया है,
बदल रही है अपनी तक़दीरें,
प्रबल प्रेरणा आधार बना है। 

मैं भी नारी!अपना वज़ूद लिए,
शिक्षा कर्म तपस्या से प्रेरित हूँ,
कर्तव्यनिष्ठा परिश्रम जज्बात,
नभ छूने की निरंतर कोशिश में हूँ।

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