स्पिती वैली की रोमांचक यात्रा का पहला दिन – गुलाबी नगरी जयपुर से कुफरी 

जय माता दी
हर-हर महादेव
आभार –
1. भारत सरकार
2. हिमाचल प्रदेश गवर्नमेंट
3. पुत्रियां
4. ड्राइवर
5. गूगल
हिमालय पर्वत पर स्थित देव भूमि हिमाचल प्रदेश के स्पिती वैली की रोमांचक यात्रा का पहला दिन – गुलाबी नगरी जयपुर से कुफरी
गुलाबी नगरी जयपुर से घनघोर बारिश में 11 दिन के सफर की कार में बैठ कर शुरुआत हुई,मन में ख़ुशी, डर,अपूर्व रोमांच आदि सभी भावों का सम्मिश्रण था, राजस्थान के ड्राइवर बलराम के लिए हिमाचल की ही नहीं पहाड़ों की यात्रा पहली बार थी,वो हमें सफर की शुरुआत करने के तुरंत पहले पता चला और पूरा सफ़र योजनाबद्ध तरीके से बनाया हुआ था,अधिकांश जगहों पर धनराशि जमा कर दी गई थी,इसलिए दूसरा विकल्प कोई ही नहीं बचा था। रोमांच पर एक और बाउंसर लग गया था।
हिमाचल देव भूमि हिम का अंचल प्रकृति की गोद में अत्यंत सुंदर प्रदेश है, साथ ही इसके साथ लगा हुआ चीन तिब्बत बॉर्डर भी है,ये अत्यंत ही जोखिम भरी यात्रा है? कैसे होगी? कैसी होगी? मन में सैकड़ों सवाल उठ रहे थे, बरसात इतनी भयंकर रूप धारण किए हुए थी कि जैसे बादल धरती पर उतर आए थे, उधर गाड़ी सड़क पर सरपट दौड़ रही थी,कोटपुतली से तुरंत पहले एक्स्प्रेस हाईवे मक्खन की तरह बना हुआ वो मार्ग है,जहाँ गाड़ियां हवा से बातेँ करने लगती है,इस हाईवे पर कुल 10 निकासी है, पर कई -कई किलोमीटर में दूर-दूर तक अभी कोई  ढाबे वगैरह नहीं बने हुए हैं,फिर हमें मिला शेर-ए-पंजाब रेस्तरां, जहां पर खाना बड़ा जायकेदार मिलता है, खाने का लुत्फ उठा कर आगे पहुँचे ज़कीरपुर, भीड़-भाड़ से भरा हुआ शहर,बाजारों में व्यस्तता और सड़कों पर जाम लगा हुआ था, इससे किसी तरह निकलते हुए शिमला के लिए हो लिए, फोर लेन रोड और मज़े की बात ये थी कि सुबह से शाम हो रही थी, पर कोई थकान नहीं महसूस हो रही थी क्योंकि मन में यात्रा के लिए उत्साह भरा हुआ था और देखते ही देखते रात हो गई।
कुफरी में पहली बुकिंग की हुई थी,पता चला कि होटल ढ़ाई किलोमीटर कच्चे रास्ते के बाद आएगा, ऑफ रोडिंग करनी पड़ेगी, कच्चे रास्ते पर उतर गए, घनघोर अंधकार, हाथ को हाथ नहीं दिखाई दे रहा था, एक तरफ पहाड़ और दूसरी ओर खाई, भरी ठंड में पसीने छूटने लगे, बड़ी मुश्किल से सामने एक ट्रक जा रहा था और हम भी उसके पीछे-पीछे हो लिए, जैसे वो हमारा भगवान बन कर सामने आ गया था, पर कुछ देर बाद वो भी दिखाई देना बंद हो गया, गूगल ने भी साथ देना बंद कर दिया, बैटरी भी लाचारी पर थी, किसी तरह होटल के मैनेजर ने फोन पर हर मोड़ पर साथ देकर हमारी मदद की और अंत में हम पहुँचे ऐसे होटल में, जिसे कह सकते हैं जंगल में मंगल।
बेहद खूबसूरत,शानदार कमरा, लज़ीज़ डिनर के साथ बोन फायर, बॉलीवुड का मधुर संगीत, 12 घंटे के सफ़र के बाद बड़ा आनंद मिला,मन चंचल है, जो मिलता है, उससे बहुत खुश होता है, पर आगे के घोड़े दौड़ाने में उसका कहाँ कोई मुकाबला कर सकता है, इसलिए ये सब तो ठीक था, पर एक कोने में चिंता सता रही थी कि इतने टूटे फूटे कच्चे रास्ते पर चल कर फिर से ऊपर हाइवे तक कैसे पहुंचेंगे?सोचते हुए सब कुछ भगवान पर छोड़ कर सो गए, दूसरे दिन क्या हुआ अगले पोस्ट में।

2 Comments

  1. बहुत ही रोचक वर्णन। मधु जी कमाल है।
    सुनीता माहेश्वरी
    नाशिक

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