स्पिती वैली की रोमांचक यात्रा का नवाँ दिन – कल्पा

हिमालय की गोद में स्थित देव भूमि हिमाचल प्रदेश के स्पिती वैली की रोमांचक यात्रा का नवाँ दिन – कल्पा
रोमांच तो इस यात्रा में भरपूर था,जाते-जाते मन में आई और नाको की झील के किनारे गए, 20 मिनट की बोटिंग की, ज़िंदगी के मजे उठाए क्योंकि सोच यही थी कि इस ओर अब आना होगा ना दोबारा तो क्यों नहीं जी ले और मज़े ले लेवें सारा, इस यात्रा का एकमात्र यही तो उद्देश्य था हमारा।
यहाँ से हम किन्नौर जिले के कल्पा गाँव के लिए चल दिये, जिसकी ख़ुबसूरती बेमिसाल है, कल्पा के पूर्व रेकोंग पिओ आता है,जो मुख्य बाजार है।
पोहारी झूला से दो रास्ते है, एक काजा के लिए, दूसरा रेकोंग पिओ के लिए, जो आगे कल्पा को जाता है,, काजा से आते समय ये कट ध्यान नहीं रहा और हम 15 किलोमीटर रामपुर की तरफ आ गए, फिर वापस लौटना पड़ा और सही रास्ते पर आगे बढ़े।एक विशेष बात काजा जाने के समय पेट्रोल, डीजल रेकोंग पिओ में फुल करवाना चाहिए, टायर्स की हवा चेक करवा लेनी चाहिए, क्योंकि उसके बाद काजा तक कोई पेट्रोल पंप नहीं मिलता है।
सड़कों पर रौनक खूब थी। पर्यटकों की बहार थी।
चौक में पुलिस खड़ी थी, यातायात को सुगम बनाने के लिए पूरी तरह तत्पर दिखाई दे रही थी।
यहाँ बस स्टेंड पर गोलगप्पे, टिकिया और चाट भंडार की दुकान थी, जिसका स्वाद बेहतरीन था। ऊनी वस्त्र काफी अच्छे मिलते हैं,जिसकी थोड़े बहुत खरीददारी करी।सूखे मेवे की क्वालिटी बहुत अच्छी है,जिसकी पूरे विश्व में वितरण होता है, साथ ही यहाँ के मटर बहुत स्वादिष्ट होते हैं, खरीदने के बाद हम कल्पा की ओर चल पड़े।
कुछ चीजें इतनी खुबसूरत होती है कि वो समेटी नहीं जा सकती, जैसे नदी, पहाड़, आकाश और ये किन्नोर जिले में बसा कल्पा।
हमारे लिए कल्पा के नए गगन में नया सूरज चमक रहा था, घाटियों में लहलहाता हर एक देवदार वृक्ष दमक रहा था।मान्यता है कि कैलाश पर्वत पर रहने वाले भगवान शिव सर्दियों में अपना कुछ समय बिताने के लिए यहाँ आते हैं।बर्फीले पहाड़ों के बीच छिपा धरती का स्वर्ग।
पहाड़ी क्षेत्र में बसे गाँव की बात ही कुछ न्यारी होती है। गूगल होटल पहुँचने का जो रास्ता बता रहा था, वो आगे जाकर किसी कारणवश बंद था, अब दूसरा रास्ता उसके बस में नहीं था, होटल वाले का फोन नहीं उठ रहा था, बड़ी देर तक पूछते-पूछते हम पहुँचे अपने होटल पर।
वहाँ हमारा स्वागत-सत्कार पीले दुपट्टे को पहना कर किया और वेलकम ड्रिंक दिया,जो हमारे थकान को दूर करने के लिए पर्याप्त था।
चौथे माले पर उन्होंने सबसे बेहतरीन कमरा देकर किन्नर कैलाश के दर्शन करवाये और कहा कि यहाँ से आपकी सूर्य अस्त होते हुए बहुत सुंदर दिखेगा, हम बहुत खुश हो गए।
आरामदायक दिन था, प्रकृति की आबो हवा में अद्भुत नशा था।
शोर, आपाधापी, भागदौड़ से हम बिल्कुल दूर थे।सुख, सुकून, शांति और स्थिरता की पराकाष्ठा थी।
सूर्य अस्त के बाद हम आसपास घूमने पैदल निकल पड़े, कुछ दुकानों में गए, बातें की, वहाँ के जीवन शैली के बारे में जानकारी हासिल की, फिर होटल आकर रात्रि का भोजन लिया।
उन्होंने होम थिएटर में कुछ खास वीडियो दिखाए, जो बर्फीली सर्दी के समय की यात्रा के थे और ट्रेकिंग करके कहाँ तक जाया जा सकता है,देख कर असम्भव लग रहा था,सोच के पंख फैलने लगे थे कि क्या हम भी ऐसी यात्रा कर सकते हैं, ये बात जरूर है कि हमारे और आपके सोचने से कुछ नहीं होता है, असंभव को सम्भव सिर्फ परमात्मा ही कर सकता है। कल सुबह हमें कल्पा के सुसाइड पॉइंट जाना था, वहाँ हमने क्या देखा, वो बताऊंगी आपको मेरे अगले पोस्ट में।

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