हनुमान जी की कर्म भूमि-श्री लंका

प्रेम और भक्ति रस से सरोबार श्री लंका की यात्रा।
रामायण हमारे भारत का संस्कृत में लिखा पौराणिक अनुपम महाकाव्य है,जिसके रचयिता आदि महाकवि श्री वाल्मीकि जी हैं।इस महाकाव्य के माध्यम से रघुवंशी राजा भगवान राम जी के गौरव गाथा का विवरण है।रामायण के इस महाकाव्य में भगवान श्री राम के साथ दशशीश रावण का भी उल्लेख किया गया है, जो लंका का राजा था।लंका का 1972 तक पूर्व नाम सीलोन था,जिसे बाद में लंका और फिर सम्मानपूर्वक श्री लंका के रूप में जाना जाने लगा। श्री लंका द्वीप पर जाने के लिए विभिन्न राज्यों से भारत के 26 लोग भक्ति और प्रेम रस से सरोबार होकर निकल पड़े।यह द्वीप परिवहन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थान है।
रामायण की यात्रा का सबसे बड़ा रोमांच था कि सोने की लंका को देखना था, पर दरअसल सोने की लंका तो मायावी नगरी थी,जो रामायण के प्रकरणों के अनुसार वह तो समुद्र की गहराई में समा गई, तो अब सोने लंका तो कैसे दिखती!लेकिन श्री लंका के लोगों ने प्रकृति और पर्यावरण के विकास और संरक्षण के लिए इतना सुदृढ़ कार्य किया है कि यहाँ की धरती ही सोना उगलने लगी है।यहाँ हर घर में वृक्ष लगे हैं,जिसे सरकार की अनुमति बग़ैर काटा नहीं जा सकता है।यहाँ का हर व्यक्ति पर्यावरण की सुरक्षा करता है,जिसे ये लोग अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी मानते हैं।
सर्वे के मुताबिक अन्य देशों की तुलना में अमीर-गरीब के बीच का भेद भी काफी कम है।नैसर्गिक सौंदर्य के बीच यहाँ के लोग बड़ा ही संतुष्ट जीवन यापन करते हैं।रावण ने अपनी विरासत में ज्ञान का स्तर ऐसा छोड़ा कि यहाँ पर 92% लोग शिक्षित हैं।श्री लंका में सरकार द्वारा शिक्षा और स्वास्थ्य पर पूर्ण सहयोग एवं निःशुल्क व्यवस्था उपलब्ध कराईं जाती है। साफ,सफाई और स्वच्छता पर जाग्रति, इस देश की आबो-हवा और प्राकृतिक सुन्दरता को और भी बढ़ाती है।हम भगवान श्री राम की जन्म भूमि से जुड़े होकर भी आज तक स्वच्छता, पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य इत्यादि जैसी मूलभूत  समस्याओं से जूझ रहे हैं और वहीं दूसरी ओर रावण की धरती पर वहाँ के लंका वासी प्रकृति से आत्मसात कर स्वच्छ, सुंदर एवं संतुष्ट जीवन यापन कर रहे हैं।
बड़ी वेदना हुई इसे देख कर कि भगवान श्री राम का मंदिर कहाँ बनेगा,कैसे बनेगा? इस तरह के धार्मिक विवादों के मध्य हमारे देश के भ्रष्ट नेताओं, धर्म पालकों एवं धर्म विचारकों ने इस देश की भोली-भाली जनता को इस तरह जकड़ा कि हमारी सोच को इस मुद्दे से कभी ऊपर  उठने ही नहीं दिया,नतीज़न हम जहाँ थे,वहीं रह गये। सवाल यह है कि रावण की लंका तो विकसित हो गई, पर हम कब होंगे? कब उस स्तर तक पहुँचगे जिसके हम योग्य है?हमारे भारत की तुलना में श्री लंका की जनसंख्या सिर्फ एक राज्य के जितनी भी नहीं है,पर यहाँ हर कोई विकास के लिए ऊर्जावान है।भारत से मात्र 31 किलोमीटर की दूरी पर यह द्वीप देखने में दक्षिण भारत का ही स्वरूप नज़र आता है।यहाँ सिंहली भाषा के साथ तमिल भाषा का भी भरपूर प्रयोग किया जाता है। यहाँ 70% बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं, 18% हिन्दू धर्म की मान्यता है, बाकी 12% मुस्लिम एवं क्रिश्चियन धर्म को मानने वाले लोग हैं।
रामायण यात्रा की इस टूर में मुन्नेश्वरम मंदिर के दर्शन अति अद्भुत है।भगवान राम जब रावण से युद्ध में विजय प्राप्त कर गरुड़ पर सवार होकर भारत लौटने लगे तब उनका गरुड़ विमान श्री लंका के उस स्थान पर रुक गया जहाँ सीता मैया को ले जाते समय रावण ने शिवजी की पूजा-अर्चना की थी।रावण जाति से ब्राह्मण था और उसका वध करने से भगवान श्री राम को ब्रह्मस्ति दोष लगा अतः शिवजी के आदेश पर रामजी ने चार शिवलिंग की स्थापना की, जिसमें से तीन श्री लंका में हैं और एक भारत में रामेश्वरम धाम से प्रसिद्ध है।
श्री लंका में रामायण का स्वरूप हमारे भारत से भिन्न है, यहाँ के लोगों का मानना है कि दशरथ पुत्र राजा राम एवं दसशीश राजा रावण का राज्य के लिए महासंग्राम हुआ था और सीता मैया रावण की बहन थी,जो राम जी के साथ खुश नहीं होने की वजह से रावण उनको भारत से लेकर आया और माँ सीता को उसने सात साल तक अशोक वाटिका में छिपा कर रखा और यहीं वजह है कि माँ सीता को रावण ने कभी भी स्पर्श नहीं किया, इसलिये लंकापति महाज्ञानी रावण इस देश में पूजनीय है।चूँकि लक्ष्मण जी ने रावण की बहन शुपॅणखां की नाक काटी,जिसका बदला लेने के लिए यह युद्ध हुआ।
अशोक वाटिका में लाखों की तादाद में अशोक वृक्ष दिखाई पड़ते हैं, साथ ही बड़ा ही मनोहर सीता झरना जहाँ सीता जी स्नान करती थी उसके साथ वहाँ सीता एलिया,जिस गुफा में सीता जी को रखा गया था, ये सभी देखने योग्य स्थल है।यहाँ पर रामायण की प्राचीन संस्कृति और एतिहासिक धरोहर को भारतीय पर्यटकों के लिए आज तक सुरक्षित रखा जा रहा है।
कैन्डी से नुवारा एलिया के बीच रमबोडा में चिन्मय मिशन द्वारा बनाई गई राम भक्त हनुमान जी की यह अति भव्य प्रतिमा सोलह फीट ऊँची दर्शन के योग्य है।कहते हैं कि रावण से युद्ध करने के पहले यहाँ पर ही सेना का गठन किया गया था। भारतीयों के लिए ही बनाये गये इस मंदिर में पिछले बरस भारतीयों के लिए ही दर्शन निषेध कर दिये गये थे, वजह थी अस्वच्छता,जो हमारे लिये शर्मिंदगी का विषय है।पर उनके अनुसार अब आने वाले भारतीय यात्रियों में सफ़ाई के प्रति जागरूकता बढ़ने की वजह से यह अद्भुत दर्शन उपलब्ध कराये जाने की अनुमति फिर से दे दी गई है।दूसरी बात सीखने को मिली कि बुद्धिमान शत्रु के बल वीरता और पौरुष को भी ग्रहण करना चाहिए।रावण की भूमि में हनुमान जी का विशाल मंदिर के दर्शन हमें यही संदेश देते हैं।
इस यात्रा ने हमें बहुत बड़ी सीख दी है जिसे “एक पहल” के माध्यम से देशवासियों को जागरूक करना है कि इतने कम हिन्दुत्व को मानने वाले देश के लोग जब हमारे ही राष्ट्र की संस्कृति और धरोहर की रक्षा कर सकते हैं तो हम अपने धरोहर को क्यों नहीं संभाल पाएंगे! निश्चित तौर पर हमें यथासंभव सभी को मिलकर इसकी रक्षा करनी होगी।
नुवारा एलिया की प्राकृतिक छटा बेहद निराली है।इस खूबसूरती में हर किसी का मन खो जाता है।इस मार्ग पर चाय बागानों की सुन्दरता देखते ही बनती है।श्री लंका द्वीप विश्व का तीसरा बड़ा चाय का निर्यातक देश है।
कतरागमन की ओर जाते हुए रावण एलिया और रावण झरने को देख कर बड़ा आनन्द  का अनुभव होता है।कतरागमन में गणेश जी के छोटे भ्राता श्री कार्तिकेय जी का मंदिर है,भगवान श्री गणेशजी को जब प्रथम पूजनीय की मान्यता दी गई, तब भगवान कार्तिकेय रूठ कर श्री लंका में आ गये और यहाँ आकर उन्होंने एक विवाह और रचाया, इस मंदिर की आस्था दक्षिण भारत के लोगों में भी बहुत ज्यादा है।यह मंदिर बेहद विशाल क्षेत्रफल लिए हुए है और पद यात्रा के लिये प्रसिद्ध है।
श्री लंका हनुमान जी की कर्म भूमि थी।अशोक वाटिका से सीता मैया के दर्शन के बाद उनकी पूंछ में आग लगा दी गई थी, तब उन्होंने पूरी लंका में तबाही मचा कर उसानगोडा के समुद्री तट पर आकर अपनी पूंछ में लगी आग को बुझाया, जिसकी वजह से यहाँ की भूमि लाल रंग की दिखाई पड़ती है। समुद्री तट, लाल मिट्टी और तीव्र वायु वेग का संगम आपको महाकाव्य रामायण से जुड़े प्रकरण से पूर्ण रूपेण जोड़ता है।
रावण से युद्ध के दौरान लक्ष्मण जी जब मूर्छित होते हैं, तब हनुमानजी उनके जीवन की रक्षा के लिए संजीवनी बूटी लाने हेतू पूरे हिमालय पर्वत को उठाकर ले आते हैं और फिर वापस अपनी जगह पहुँचाने के दरमियाँ जो पहाड़ के टुकड़े गिरते हैं, उनमें से एक टुकड़ा रूमास्ला में दिखाई पड़ता है, जिसे देखकर राम भक्त हनुमान जी के सेवा-भाव, बल-पौरुष, शक्ति, वीरता और भक्ति का परिचय मिलता है।हनुमान जी जैसे सच्चे सेवक का जितना गुणगान किया जाये,वो सदैव कम ही रहेगा,यही कारण है कि आज तक किसी भी सच्चे सेवक की तुलना सर्वदा हनुमान जी से ही की जाती है, परंतु क्या आज सचमुच  भारत में हनुमान जी के रूप में सच्चा और ईमानदार सेवक मौजूद भी है क्या? मौजूदा हालातों में यह सवाल हमें सोचने को मजबूर करता है?
यहीं से हम श्री लंका के बेन्टोटा शहर की ओर निकल पड़े। यह समुद्री तट पर स्थित अत्यंत रमणीय स्थल है। यहाँ अति सुन्दर और सुविधाओं से युक्त रिसोर्ट बने हुए हैं। यूरोपियन सैलानियों का यहाँ जमावड़ा लगा रहता है।वॉटर स्पोर्ट्स से जुड़ी कई गतिविधियाँ यहाँ होती है,जिससे पर्यटकों का भरपूर मनोरंजन होता है।
रावण का यह देश जिसको हिंसा और राक्षस प्रवृति के रूप में हम सभी जानते हैं, वही देश अभी अहिंसावादी राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल है।मौर्य सम्राट अशोक के पुत्र संतान महेन्द्र के यहाँ आने पर बौद्ध धर्म का आगमन हुआ और इस धर्म को मानने वाला यह देश शांतिप्रिय और अहिंसावादी है ।
श्री लंका की वर्तमान राजधानी कोलंबो एक विकसित शहर है और चाइना गवर्नमेंट यहाँ के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर आर्थिक सहयोग करके भरपूर विकासशील देश बनाने के लिए प्रयासरत है, जिससे यहाँ के स्थानीय लोगों में बेहद खुशी है। बहुमूल्य रत्न, चाय,लकड़ी के समान, सिले सिलाये वस्त्रों का विश्व स्तरीय बाज़ार उपलब्ध है। नारियल यहाँ का सर्वश्रेष्ठ उत्पादन है।
दक्षिण भारत के तमिलनाडु से भी छोटा देश, श्री लंका की संपूर्ण यात्रा के दौरान प्राकृतिक दृश्यों एवं समुद्री लहरों को निहारते रहना जीवन की सुंदर अनुभूति रही और सुखद एहसास के साथ भारत लौटने के समय विमान में एक तथ्य और सामने आया, जो हमें काफी अच्छा लगा। बौद्ध धर्म के अनुयायी श्री लंका के लोग भारत के वाराणसी, बौद्ध गया, नालंदा इत्यादि शहरों को बेहद पसंद करते हैं और भारत आने के लिये बेहद उत्साहित होते हैं, अतः हमारा दायित्व बनता है कि हमें अपनी स्वच्छता, संस्कृति और इतिहास को सुरक्षित रखना होगा, इन पर्यटकों के लिए जिन्होंने हमारी प्राचीन धरोहर को संभाल कर रखा है।
क्या आपको नहीं लगता कि भगवान राम की जन्मभूमि पर राम जी का मंदिर होने से विश्वव्यापी पर्यटकों में भगवान राम की प्रति आस्था बढ़ती?

15 Comments

  1. श्रीलंका का अति सुंदर चित्रण और साथ में भारतीयों के लिए बहुत जरूरी संदेश. एक बार पूरा लेख जरुर पढ़े और अपने comment भी प्रषित करे.

    1. Author

      बहुत बहुत धन्यवाद।

  2. आपके द्वारा रखे गए विचार अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है आप द्वारा श्री लंका यात्रा पर पौराणिक मान्यताओं एवं कथा कथित वर्णन किया है । मानस पटल प्रसन्न प्रसन कर दिया है

  3. श्रीलंका के इतना सुंदर चित्रण बहुत ही अच्छा लगा,और वहाँ देखने के लिए उत्सुक हु,हर्ष की बात है कि हिन्दुवो की विरासत को उन्होंने अच्छे से संभाल के रखा है।हमारे देश की विडंबना यह है कि यहाँ पॉलिटिक्स ज्यादा है वोट की राजनीति चल रही है एक अछि सरकार आयी है लेकिन विपक्ष कैसे कपड़े फाड़ रहा है जनता सेंसेटिव है कुछ कह नही सकते, आनेवाले चुनाव में क्या होगा।
    तुम्हारी यात्रा का प्रस्तुत वर्णन बहुत अच्छा लगा ।

    1. Author

      प्रणाम।
      बहुत बहुत धन्यवाद।

  4. बहुत अच्छा लगता है जब कोई ग्रुप किसी ऐसे देश की यात्रा करता है जिसका हमारे धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है।
    भारतीय सीमा से 31 km दूर समुद्र किनारे बसा एक छोटा सा टापू जो कभी राक्षस राज रावण की सोने की लंका थी और आज तमिल लोगो की नगरी जहां बौध्द धर्म के अनुयाई ज्यादा है जो सीलोन श्रीलंका बना जिसका विस्तृत वर्णन जिसमे वहां की प्रकृति,पर्यावरण,विकास, शिक्षा का स्तर,साफ सफाई एवम स्वछता तहत लोगों में जन जागृति,वहां का नैसर्गिक सौंदर्य ,धर्म के प्रति लोगों की आस्था, इत्यादि के बारे ने आपने अपने श्री लंका की यात्रा तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार बड़े ही सुंदर ढंग से सचित्र वर्णन किया। वर्णन भी ऐसा जैसे लग रहा हो कि हम भी यात्रा कर रहे है।
    पवनसुत हनुमानजी ने लंका में जो लीलाये की हमारे ग्रंथ रामायण में वर्णित सुंदर कांड के अंतर्गत आता है जिसे मनन करने से आत्म संतोष प्राप्त होता है तो प्रत्यक्ष उस स्थल की यात्रा का आनंद कितना संतोष प्रिय होगा वह यात्रा करने के बाद ही अनुभव होता है।
    वहां के लोगों का कहना कि सीता मैया रावण की बहन थी और श्री राम ने लंका राज्य प्राप्त करने के लिये युद्ध किया यह बात कुछ गले नही उतरती।
    हा शिव भक्त दशानन रावण जो जाती से ब्राम्हण थे जरूर वहां पूज्यनीय होंगे यह बात हम मान सकते है।
    भारत जैसा विशाल देश एवं श्रीलंका जिसकी जनसंख्या भारत के एक राज्य जितनी है दोनो देश की तुलना करना तर्कसंगत नही है ।
    हमारी आस्था प्रभु श्री राम में है और उनके जन्म स्थल पर जहां कभी भगवान श्री राम का भव्य मंदिर था जिसे मुगल सम्राट बाबर के आदेश पर उनके सैनिक मीर बाकी ने ध्वस्त कर बाबरी मस्जिद बनाई थी (जो अब खंडहर से कुछ कम नही) प्रभु श्री राम की कृपा से यह स्थल पुनः भव्य मंदिर जरूर अख्तियार करेगी।
    पूरा विश्व जानता है अयोध्या प्रभु श्री राम की कर्म भूमि है। चाहे कितने भी राजनीतिक नेता वोटबैंक के खातिर अपने नजरो से मंदिर को नकार रहे है फिर भी राम जन्म स्थल पर प्रभु श्री राम का मंदिर जरूर बनेगा ओर विश्व के लिए यह धार्मिक नगरी एक पर्यटन स्थल का रूप जरूर लेगी
    जय श्री राम 🙏🏼 जय श्री कृष्ण

    1. Author

      आपकी प्रतिक्रिया बहुमूल्य है।
      आभार।

      1. Author

        आपकी लेखनी वाकई तारीफें काबिल है 👌🏾बहुत सुंदर तरीके से आपने प्रतिउत्तर दिया है। विशेष बात यह है कि रावण का लंका में कोई मन्दिर नहीं है और उसे कोई भगवान का रूप भी नहीं दिया है, वहाँ रामायण के लिखे स्वरूप को आकार दिया है जिससे भारतीय पर्यटक इसका पूरा अनुभव और आनंद उठा सके क्योंकि इस देश में बौद्ध धर्म को ही प्राथमिकता दी हुई है।आप का स्नेह यूँही बना रहे 🙏

  5. बहुत सरल एवं सही तरह से श्री लंका के बारे में आपने बताया। वास्तव में कहने को भारत से बहुत छोटा हे परन्तु हमें वंहा के लोगों से भी बहुत कुछ समझने की ज़रूरत हे। आपने बहुत कुछ लिखा हे इसके अलावा वहाँ के लोगों में traffic sense जो हे, वास्तव में बहुत अच्छा लगा traffic police की ज़रूरत ही नहीं लगती हमें भी ये छोटी सी बात उनसे सीखनी चाहिए🙏🙏

    1. Author

      आपका आभार। श्री लंका की यात्रा ने कई सीख दी उसमें से ये बात भी बहुत अच्छी थी कि वहाँ यातायात पुलिस की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि वहाँ का नागरिक इसके प्रति जागरूक है।

  6. Most travelers, however, make very big mistakes whenever they are going into new environments. They forget to book cars that will peak

  7. Author

    आपकी लेखनी वाकई तारीफें काबिल है 👌🏾बहुत सुंदर तरीके से आपने प्रतिउत्तर दिया है। विशेष बात यह है कि रावण का लंका में कोई मन्दिर नहीं है और उसे कोई भगवान का रूप भी नहीं दिया है, वहाँ रामायण के लिखे स्वरूप को आकार दिया है जिससे भारतीय पर्यटक इसका पूरा अनुभव और आनंद उठा सके। इस देश में बौद्ध धर्म को ही प्राथमिकता दी हुई है।आप का स्नेह यूँही बना रहे 🙏

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