ए पुरुष!

धरती से अंतरिक्ष तक महिला जौहर दिखा रही
कभी प्रधानमंत्री कभी विदेश मंत्री कभी रक्षा मंत्री बनकर
देश की हर समस्या को सुलझा रही
वित्तीय आर्थिक भौगोलिक राजनीतिक हो या बैंकिंग
हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवा रही
औरत नहीं सिर्फ भोग्य वस्तु वो बड़ा कमाल दिखा रही
पुरुष प्रधान रूढ़िवादी समाज में हर संभव प्रयास करती जा रही
स्वर्णिम भारत की रख रही नींव नए दौर का आगाज़ लगा रही
राष्ट्र को शिखर पर लाने के लिए है तत्पर
अधीर सशक्त योगदान देती जा रही
ए पुरुष! क्या अब भी तुमको समझ नहीं आ रही।

ये विचार उन चंद लोगों के लिए...
जो औरतों का करते सम्मान 
देते उन्हें विशिष्ट स्थान
औरत के सहभागी बनकर
और कभी सहयोगी बनकर
सच्चा धर्म निभाते हैं
मेरी नज़र में ऐसे पुरुष ही
असली मर्द कहलाते हैं।

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