देश प्रेम-लघु कथा

एकता ,भाइचारा, देश प्रेम

लघु कथा संस्मरण के रूप में

कई समय से एक सवाल मन में कौंध रहा था कि क्या  चुनावी समय में,स्वाधीनता दिवस, गणतंत्र दिवस पर देश भक्ति के गानों से ही देश प्रेम और देश के प्रति कर्तव्य पूरा हो जाता है?

संयोग से लद्दाख की यात्रा पर जाने का सुअवसर मिला। खारदूँगला पास से नुबरा वैली की ओर जाने के समय हिम स्खलन से पूरा रास्ता अवरुद्ध हो गया था।करीब 200  गाड़ियों के सभी लोग उस में फंसे पड़े हुए थे।हमारे साथ पहाड़ी तीन सॉफ्टवेयर इंजीनियर लड़के जो ड्राइवर थे। मजबूत एवं सुदृढ़ सोच वाले थे, उन्होंने हमसे पहले आज्ञा मांगी कि अगर आप को हम पर भरोसा और विश्वास है तो हम इन फंसी गाड़ियों को आगे बढ़ाने में मदद कर देते हैं फिर आपको वैली आराम से पहुंचा देंगे, पर रात देर हो जाएगी।पूरी बर्फ से भरी वादियाँ जहां सफ़ेद दूधिया चादर बिछी थी, ऐसी सफ़ेदी जो आँखों को चकाचौंध कर रही थी।हम ईश्वर से अपनी सलामती की प्रार्थना कर रहे थे और उन्होंने फिर जो सहयोग का सिलसिला शुरू किया, वो न भूलने वाली याद है, चैन से गाडियों को बर्फ पर खींच – खींच कर ऊपर चढ़ाना और आगे का रास्ता बनाना देश भक्ति के हितार्थ ग़ज़ब की मिशाल थी। शाम तक मिलिट्री भी मदद के लिए आ चुकी थी।इतने बर्फीले मौसम में सबका ऐसा ज़ज्बा देखकर यही प्रेरणा मिली कि एक दूसरे को सहयोग देना ही सच्ची देश भक्ति है।

देश भक्ति सिर्फ ढोल बजाने से नहीं अपितु एकता, भाईचारा, सहयोग से होती है।

हमें पहुँचने में आधी रात तो अवश्य हो गई थी, पर जीवन पर्यंत के लिए देश भक्ति की सीख और न भूलने वाला संदेश मिला है।

देश प्रेम की कहानी
आज मधु की जुबानी
जांबाजों को मेरा नमन
सौंधी खुशबू़-ए-वतन।

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