शीर्षक -प्रकाश पर्व रोशनी की किरणों ने कल का सवेरा दिखा दिया अधखुली आँखों में नया स्वप्न जगा दिया सुकून के पलों का घरों में आशियाना बना दिया आहिस्ता-आहिस्ता कोहरे का निशाँ मिटा दिया प्यार के जज़्बातों को अंतरात्मा में भरा दिया कोरोना के दहशत से बाहर निकलने का रास्ताContinue Reading

कैसी ये त्रासदी, कैसा ये शहर भटक रहा मज़दूर हो रहा दर बदर घर बनाने वाला ख़ुद ही हुआ बेघर    न वर्तमान न ही भविष्य की रखता ख़बर। 

माँ पत्नी बेटी बहन और भाभी इनके हाथ में है घर की चाबी रसोई घर को मसालों से महका रही है लज़ीज़ व्यंजनों को पका कर खिला रही है सबकी फर्माइशों को पूरी करने में अपना जी जान लगा रही है।  दूसरी ओर…. पिता पति बेटा बहनोई और भैया येContinue Reading

ताश शतरंज कैरम सिक्वेंस लूडो उनो ऑनलाइन हाउजी आप सब क्या खेल रहे हो                 हमें भी तो बता दो जी…   समझदारी ख़त्म, कोरोना की बातेँ छोड़ो, घर बैठकर आओ खेले खेल ऐसा खेल खेले हम जिसमें जीत हो चाहे हार हो मित्रों और रिश्तेदारों के साथ  आनंद जिसकाContinue Reading

पुराने एल्बमो की धूल  झाड़ने का समय आ गया है। बीती यादों के साथ अपनों से जुड़ने का समय आ गया है।

ख़्वाबों की होली मैंने तेरे संग खेली ख़्वाबों की होली,  दिल की बात अब तक मैंने तुमसे नहीं है बोली।  कोई रंग न लगाया कोई गुलाल न उड़ाया मनमोहक ये रूप तेरा  मैंने मन में है सजाया। मेरी ख़्वाबों से निकलो बाहर आ जाओ खेले होली,  दिल की बात अबContinue Reading

नमस्ते ट्रम्प – अद्भुत  – सारे राजनीतिक दलों के भरपूर विरोध के मध्य लक्ष्य साधे हुए हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र जी मोदी ने हम भारतीयों को विश्व के पटल पर एक कदम और अग्रसर किया। कल तक हम भारतीयों के लिए अमेरिका बहुत ऊंची हस्ती थी और अब मोदी जीContinue Reading

हद से गुजरने की है ख़्वाहिश  मुझे माफ़ कर देना तेरे दिल में उतरने की फरमाइश़ मुझे माफ़ कर देना  आज रात तेरे दीदार के ख़ातिर पल भर जो अगर ठहर जाऊँ तो मुझे माफ़ कर देना

धरती अम्बर चाँद सितारे लगते हैं कितने प्यारे  जीवन के बंधन न्यारे   प्रीतम छूटते टूटते तारे   शोक नहीं मनाते सारे जो बीत गई वो रात है चाँद के बाद फिर से सूरज का आगाज़ है। Attachments area

हाय रे ये ठिठुरती ठंड!!!! पौष माह ये सर्द ठिठुरती रात निर्धन को प्रकृति की कठोर सौगात थर थर कांपते उसके अंग प्रत्यंग सोते जागते करवट लेकर रात निकाले गुदड़ी के संग। हर सुबह सोने की किरणों का इंतजार कभी-कभी हो जाता बेबस और लाचार जब ओले वृष्टि से तापमानContinue Reading