ज़माने की तल्खियों से चित्कार करता मन सौ शब्दों के जाल बुन प्रतिकार करता मन ख़ामोशी कहती मन से आज मत उलझ किसी से…उलझेंगे… फिर कभी **************************** सफ़र में थी बड़ी मौज मस्ती गाना बजाना एक दूजे संग कभी ताश कभी लुडो खेलना स्टेशन आया सब गले मिले खुश होकरContinue Reading

कवि की काव्य कृति छंद लय बद्ध रीति  साहित्य की अविरल रस गंगा अद्भुत मीठी  मनोभावों की मोहिनी कलात्मक अभिव्यक्ति  हृदय तलब सुखद सुमधुर प्राचीन संस्कृति। कभी काव्य में कोमल सरस भाव बताता  कभी व्यंग्य से तीखे शब्द भरे बाण चलाता ओजस्वी काव्य से राष्ट्र नव चेतना जगाता  श्रृंगार हास्यContinue Reading

हमसफ़र ना सही हमदर्द बना लो पाँव के छालों पर मरहम लगा दो माना राह पर साथ न चल पाओगे सुख दुख बाँट कर जीना सीखा दो। किस्मत ने खेला बड़ा अज़ीब खेल मुकम्मल नहीं हुआ हमारा सफ़र तन्हाई से लिपट गया पूरा आसमाँ उदासी से भर गई हमारी प्रेमContinue Reading

ज्ञान मुद्रा में बैठ कर आँखे मूँद कर महसूस किया जीवन बहुत अद्भुत है। परमात्मा की सेवा कर दैवीय भक्ति कर महसूस किया जीवन बहुत अद्भुत है। स्वयँ से प्रेम कर खुद को समर्पित कर महसूस किया जीवन बहुत अद्भुत है। संघर्षों से टकरा कर उसको हरा कर महसूस कियाContinue Reading

सावन भादों का है ये मास रिमझिम बरस रहा आकाश। मुहँ में आया निराला स्वाद प्याज के पकौड़े की हुई बात। चूल्हे पर चढ़ाई तेल की कढाई खाएंगे पकौड़े पीछे पड़े जवाई। सुहाना मौसम गरम चाय बनाई प्लेट में पकौड़े पुरस कर आई। आप जानते हो क्या हुआ भाई! पकौड़ेContinue Reading

धरती से अंतरिक्ष तक महिला जौहर दिखा रही कभी प्रधानमंत्री कभी विदेश मंत्री कभी रक्षा मंत्री बनकर देश की हर समस्या को सुलझा रही वित्तीय आर्थिक भौगोलिक राजनीतिक हो या बैंकिंग हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवा रही औरत नहीं सिर्फ भोग्य वस्तु वो बड़ा कमाल दिखा रही पुरुष प्रधानContinue Reading

एक सत्य – अत्यधिक आर्थिक तंगी चोरी, लूट खसोट, ठगी,छलावा,जालसाजी़ व डकैती को जन्म देती है। इससे उबरने के लिए एक दूसरे पर विश्वास करके काम देना चाहिए। एक छोटा सा वाक्या आप सभी से सांझा करती हूँ, कई वर्षों से एक इस्त्री करने वाला युवा धोबी  है, जिसने अपनीContinue Reading

तीव्र हवाऐं चीरती कानों को छीन लिया ज़िन्दगी का सुकून वृक्ष हिलता पत्ता पत्ता डर रहा तेज़ रफ़्तार से गिरता पड़ता सभंल रहा न जाने क्यूँ दौड़ रहे हैं सब ठहराव नहीं किसी में अब ख़्वाबों के मुकम्मल की आरज़ू में रुकेगा ये काफ़िला कब!

मैं थकी मांदी लौटी अपने घर बाहें पसारे बेटी खड़ी द्वार पर दौड़ कर गई रसोई घर लेकर आई एक गिलास पानी पिलाया और कहा तुम थकी हो मेरी माँ थोड़ी देर बैठो मेरे पास बताओ तुम्हारे दफ़्तर में क्या हुआ आज ख़ास कुछ देर गुफ़्तगू हुई मन हो गयाContinue Reading

एक छोटी सी कहानी – संगठन छह पौधे लगाए गये।माली सब को बराबरी से उन पौधों को सीच रहा था और देखते ही देखते सारे एक साथ बढ़ते गए। एक दिन बहुत तेज आँधी चली, पर कोई भी क्षतिग्रस्त नहीं हुआ, क्योंकि सब बराबर लंबाई और मजबूती के साथ खड़ेContinue Reading