हिमालय की गोद में स्थित देव भूमि हिमाचल प्रदेश के स्पिती वैली की रोमांचक यात्रा का ग्यारहवां अंतिम दिन – कुफरी से जयपुर पंछी कितना ही आसमान में उड़ ले लेकिन शाम को वो अपने घोंसले में लौट आता है,माना गति ही जीवन है, पर ठहराव भी ज़िंदगी का अभिन्नContinue Reading

हिमालय की गोद में स्थित देव भूमि हिमाचल प्रदेश के स्पिती वैली की रोमांचक यात्रा का दसवां दिन – कल्पा से कुफरी सुप्रभात दोस्तों, आज की सुबह का रोमांच चरम सीमा पर था क्योंकि कल्पा के सुसाइड पॉइंट को देखने जाना था, तो आपको बताऊँ कि वहाँ हमने क्या देखाContinue Reading

हिमालय की गोद में स्थित देव भूमि हिमाचल प्रदेश के स्पिती वैली की रोमांचक यात्रा का आठवाँ दिन – नाको काजा के तीन दिन पलक झपकते ऐसे निकले कि पता ही नहीं चला,मन में नया जोश लेकर एवं ज़िंदगी का एक नया अनुभव लेकर यहाँ से चल दिये हम नाकोContinue Reading

हिमालय की गोद में स्थित देव भूमि हिमाचल प्रदेश के स्पिती वैली की रोमांचक यात्रा का सातवां दिन – काजा डे 3 नमस्कार दोस्तों, आज की सुबह शांत और निर्मल आनंद से भरी थी, क्योंकि काजा का ये तीसरा दिन था, सोचा थोड़ा जानकारी लेते हैं, होटल के मालिक केContinue Reading

हिमालय की गोद में स्थित देव भूमि हिमाचल प्रदेश के स्पिती वैली की रोमांचक यात्रा का छठा दिन – काजा डे 2 अपने स्पिती के सफ़र की अनुभूति को शब्दों के मोती में पिरो कर आप सब के समक्ष रखने का प्रयास किया है,जो मैंने कल रात मन में तयContinue Reading

कुछ  तो कहो ये दीवारें भी अब कहने लगी है  अकेली तन्हा पथराई सिमटी सी रहने लगी है   कितने  बरस  बीते हैं  उसके  आने की आस में  ज़र्र-ज़र्र टूटकर ज़मी पर रोज़ बिखरने लगी है।

धरती माता से है गहरा नाता आओ हम सब सम्मान करे प्रदूषण ख़त्म हो पृथ्वी हित में  स्वच्छ ऊर्जा का आह्वान करे।

रात की तन्हाई बना देती है  मुझे आवारा नापता हूँ मैं शहर की हर गली हर चौबारा रोशनी में  नहाई सड़कें भी  लगे बुझी सी ठोकरें खाता फिरूँ दर-ब-दर मारा-मारा। गुम हूँ आवारगी  में मेरा कोई ठिकाना नहीं बेवफ़ाई  में खाई चोट किसी  ने जाना नहीं कुछ अफ़वाह बेवजह बदनामContinue Reading

कुछ बातें लिखी हुई मेरे मन की, वो पुराने अखबार ले आओ बेपनाह मोहब्बत थी हमें कभी,वो पुराने एतबार ले आओ  यादों में बिखरे हुए कई अनकहे वादे, लफ्ज़ और ज़ज्बात  मेरी दिलकश आँखों में फिर से, वो पुराने खुमार ले आओ।

तीखे नैनों ने मन मोह लिया सूर सरगम ने अवरोह किया  अकुलाहट बढ़ गई दिल में लाज का घूंघट खोल दिया।