वैक्सीन नहीं है तो क्या हुआ रोज न जाने कितने मर रहे हैं संवदेना जता हम चल रहे हैं हौसलों से हल निकल रहे हैं भागदौड़ में भी संभल रहे हैं। दवा नहीं पास तो क्या हुआ दुआ से हर लम्हें संवर रहे हैं मास्क से सब दूरी बना रहेContinue Reading

अमीरी का दंभ भरने वाले कहाँ है वो अमीर चंद पैसों के लिए जो बेच देते अपने ज़मीर आजमा कर देखो इन्हें बन जाएंगे वो फ़कीर। ग़रीब तब तक ही ग़रीब है जब तक कोसता अपना नसीब है मुफ़्त के राशन से होता लाचार ये मंजर कितना अज़ीब है आगContinue Reading

A for Apple पर इससे भी कुछ ऊपर…. #Affiliation #Attention #Appreciation #Acknowledge 1.Affiliation – लोगों से जुड़ना यानि टीम वर्क – नव ग्रह से सौर मंडल, सूरज, चाँद, सितारे जिनसे बनता है पेड़ पौधों का भोजन और जीवन, उनसे हमें मिलता है आक्सीज़न, यहीं से साँसों का लेन देन, कोईContinue Reading

डॉक्टर, नर्स, सुरक्षाकर्मी, सफ़ाईकर्मी, राजनेताओं के बाद अब है हमारी बारी… स्वदेशी अपनाओ, अर्थव्यवस्था बचाओ। एक संकल्पित विचारधारा जो सिर्फ़ एक भारतीय के पास है। जय हिन्द – जय भारत🇮🇳

आज तेरहवां दिन घबराए मत! ये लॉकडाउन का तेरहवां दिन है। वैसे तेरहवां दिन बड़ा महत्वपूर्ण होता है। मृत्यु के बाद स्थूल देह सुक्ष्म रुप में रूपांतरित होकर अदृश्य हो जाती है। हिन्दू संस्कृति के अनुसार किसी की भी मृत्यु होती है तो तेरहवीं पर गंगा जल से सभी ओरContinue Reading

   ऐ ख़ाकी वर्दी वाले तुझ पर ये दिल निस्सार हो गया माना हमारी सुरक्षा के लिए दूर तेरा प्यारा संसार हो गया तेरी त्याग और कर्मठता पर नमन हमें बारंबार हो गया हमारा सफ़र-ए-जिंदगी तेरे पहरेदारी से शानदार हो गया। कोरोना की इस जंग में हम आपके आभारी हैं।

शीर्षक – दो पल गुफ़्तगू के एक चिड़ियां आज मुंडेर पर आई हँसने लगी मुझ पर और बड़ी चहचहाई माना कि तुम पर बड़ी आपदा आई कहने लगी तुम डरती क्यों हो भाई फिर उसने पंख फ़ैला कर एक कविता मुझको सुनाई…. हर रोज़ सुबह सबको जगाती हूँ इस आँगनContinue Reading

माँ का रुदन, धरती माँ का क्रंदन, परमात्मा का स्पन्दन उन संतानों के लिए जिसे उसने जन्म दिया क्योंकि जब सृष्टि किसी की उत्पत्ति करती है तो वह अपना सर्वस्व बलिदान कर उसे स्वरूप प्रदान करती है। मनुष्य को प्रेम करने से ज्यादा सरल मानवता को प्रेम करना है क्योंकिContinue Reading

कतई ऐसा न करें विवाह का खुबसूरत समारोह, दो दिलों का एकाकीकरण, दो परिवारों का मिलन, पिता के जीवन भर की जमा पूंजी से सजाई गई खुशियों की महफिल किसके लिए? अपने रिश्तेदार, मित्र और अपने पहचान वालों के लिए, जिसमें सभी लोग शामिल होकर आनंद से झूमे, नाचे,गाये, खायेContinue Reading