ख़ुद को तराश लीजिये जिदंगी बेहतर महसूस होने लगेगी बिखरे मोती को जोड़ लीजिये खूबसूरत माला सजने लगेगी विसर्जन करो मन विकारों का नव चेतना में जाग्रति आएगी चिराग़ जला कर रख लीजिये स्याह रात धुंधली हो जाएगी। दूसरों की छोड़िए ज़नाब स्वयं को जीने का आनंद आएगा अहंकार सेContinue Reading

पुस की अंधेरी रात सर्द हवाएं यादों में लेखक मुंशी प्रेमचंद इंसान और पशु प्रेम का भाव सजाती ये कथा पहली पसंद कहानी का नायक हल्कू और जबरू कुत्ते के रात्रि का संघर्ष मार्मिक कथा काव्य में रूपांतरित कर हुआ हृदय को स्पर्श पैसों की तंगी जमीनदार की धौंस जमाContinue Reading

परिंदों को पंख मिले गली मोहल्लों को मिली पहचान सचिन ने जब बल्ला उठाया राष्ट्र का बढ़ाया सम्मान मिट्टी से सने हाथ-पैरों ने लिखा इक नया इतिहास कहानी किस्से सपने बचपन के जीवित एहसास खेल-कूद पढ़ाई-लिखाई निश्चल बाल सुलभ मन भूल-भुलैया बंद कमरा न जाने क्यूँ खोता बचपन सूरज सेContinue Reading

हर उम्र के दराज़ पर एक नया रूप धरती कभी बेटी कभी बहन बन जीवन में रहती अपने स्नेह प्रेम से घर आँगन को महकाती कभी पत्नी कभी माँ बन रिश्तों को सजाती नारी जीवन संयम धैर्य सहनशीलता से चला अपनों को एक सूत्र में पिरो कर रखती कला अंतर्मनContinue Reading

साहित्य समाज का दर्पण जीवन की है आलोचना सत्य शिव सुंदर से तर्पण लोक मंगल की कामना साहित्य हम सबकी प्रेरणा संस्कृति हमारी है पहचान अपनी लेखनी को सहेजना राष्ट्र की है आन बान शान समाज का कर मार्गदर्शन साहित्यकार जलाते मशाल चिराग़ आलोकित प्रदर्शन प्रतिबिंबित करते विशाल काग़ज परContinue Reading

गांव की माटी में सौंधी खुशबू महकती हर साँसों में खेतों में मधुर राग की झनकार बैलों के घुँघरूओं में हल चलाकर आनंद बिखरता उमंग उठती फसलों में लहलहाते वृक्ष झूमती शाखाएँ पुरवाई के झोंकों में कोपलों से खिलता परिवेश गांव का घरौंदे चिड़ियाओं के कोटरों में निश्चल स्वभाव सच्चेContinue Reading

नन्हें हाथों में होता मखमली स्पर्श का प्यारा एहसास अनुभूति होती अद्भुत गोद में बच्चे का माँ पर विश्वास बच्चों की किलकारियों से गूंजता घर का हर कोना आँगन मानों कोई फुलवारी महकती बगिया में जीवन का प्रांगण पति पत्नी के प्रेम की नींव से सृजन हो जाता वट वृक्षContinue Reading

मन में बल्लियां खिल रही है निमंत्रण घर द्वार आया है सुनो सुनो सब दुनियाँ वालों आज दावत पर बुलाया है कुछ पुरानी बातें याद आई वो समय अंखियों में समाया है परिवार में सात्विक प्रेम मित्र रिश्तेदारों में स्नेह का साया है। जब साल का मिलता एक निमंत्रण मनContinue Reading

सीता मैया की संसद में हुई जय जयकार न आंख मारी न गले लगी कैसी ये सरकार बजट पेश किया विपक्ष में मचा हाहाकार अच्छा सब कुछ फिर भी करना है प्रतिकार विपक्ष में होने का यही सीख ये ही संस्कार सत्ता पक्ष के लिए यह हमेशा होता शानदार चुपचापContinue Reading

हाथ में तिरंगा लेकर झूम रहा जग सारा है मेरा भारत सबसे आगे जय हिंद का नारा है… गणतंत्र दिवस 26 जनवरी राष्ट्रीय पर्व न्यारा है देश भक्ति का ज़ज्बा रख माँ  को नमन हमारा है हाथ में तिरंगा लेकर…. कदम – कदम ताल मिलाकर जाँबाज लहू पुकारा है देशभक्तोंContinue Reading