कल का दिन मेरा बड़ा प्यारा था अठखेलियों का अद्भुत नज़ारा था सड़क पर पैदल मैं चल रही थी आँखें मेरी ताक झाँक कर रही थी तभी नज़र आए मुझे वो तीन बंदर गांधीजी की नव प्रतिमा के ऊपर अठखेलियाँ कर वो सब नाच रहे थे मन की बात बयांContinue Reading

रोटी और बेलन जैसे दिया बाती जैसे पति पत्नी संगी और साथी। रोटी और पृथ्वी दोनों ही गोलाकार एक पेट की आहार दूजी सौर की आधार। रोटी और सब्ज़ी रोटी भरती पेट सब्ज़ी देती स्वाद अच्छा मेल मिलाप। रोटी कपड़ा मकान मूलभूत सारे समान दो जून मिले रोटी ग़रीब काContinue Reading

संयुक्त जिनका परिवार खुशियाँ होती अपार थोड़ी सी होती तकरार बहुत ज्यादा सबमें प्यार अविभाजित संसार सुरक्षित घर संसार दादा दादी मीठी फटकार जीवन सुलझता कई बार चाचा चाची जिम्मेदार साथ निभाते बार बार एक रसोई घर के होते अनेकों सदस्य भागीदार परिवार व रिश्ते एक फायदे सबके अनेक त्यौहारोंContinue Reading

मैं थकी मांदी लौटी अपने घर बाहें पसारे बेटी खड़ी द्वार पर दौड़ कर गई रसोई घर लेकर आई एक गिलास पानी पिलाया और कहा तुम थकी हो मेरी माँ थोड़ी देर बैठो मेरे पास बताओ तुम्हारे दफ़्तर में क्या हुआ आज ख़ास कुछ देर गुफ़्तगू हुई मन हो गयाContinue Reading

प्रशंसा के मीठे बोल होते बड़े अनमोल। प्रशंसा मानव की अभिलाषा सुन्दर जीवन की परिभाषा। दूर होती निराशा मन में जगती आशा। सच्ची प्रशंसा हृदय लुभाती हर मन का उत्साह जगाती। प्रशंसा सफलता का सोपान बच्चों का होता उत्तम निर्माण। खेल कूद हो या पढ़ाई प्रशंसा से बढ़ती अच्छाई। प्रफुल्लितContinue Reading

शक्ति जीवन की ऊर्जा सहयोग हो या प्रतिस्पर्धा दृढ़ अनुकूल विचारों से बढ़ती हमारी क्षमता और योग्यता। मन में शक्ति का वास ग़ज़ब का होता आभास काल चक्र का पहिया भी हो जाता इसका दास। शिव शक्ति प्रकृति के आधार दिव्य हूणों के अद्भुत भंडार जगत मूल के दोनों तारणहारContinue Reading

कोरोना ने सिखाया शिष्टाचार एक दूजे को करते नमस्कार बड़ो का सम्मान छोटों से प्यार हमारी सभ्यता,संस्कृति और संस्कार। अमूल्य आभूषण व्यक्तित्व का श्रृंगार जब होता जीवन में शिष्टाचार उत्तम समाज का सुदृढ़ आधार सहयोग विनम्रता ममता उच्च विचार। निश्चल प्रेम सद्भावना सद्व्यवहार प्रथम सीख देता परिवार गुरु ज्ञान सेContinue Reading

बोली की मिठास से होती हमारी पहचान संतों ने बताया हमको बनता जीवन महान। हर सीख जो थी उनकी भूल गया देखो इंसान कड़वाहट से नष्ट किया भूत भविष्य और वर्तमान। बोली की तीखी मार तलवार से पैनी धार हृदय चीर करती घाव मन भरते दुख के भाव। कांव कांवContinue Reading

अमीरी का दंभ भरने वाले कहाँ है वो अमीर चंद पैसों के लिए जो बेच देते अपने ज़मीर आजमा कर देखो इन्हें बन जाएंगे वो फ़कीर। ग़रीब तब तक ही ग़रीब है जब तक कोसता अपना नसीब है मुफ़्त के राशन से होता लाचार ये मंजर कितना अज़ीब है आगContinue Reading

सर पर खुला आकाश पांव ज़मीं पर, ठंडे पवन के मस्त झोंके ,तन पर गिरती टप-टप बारिश की बूँदों ने रोम-रोम को पुलकित किया और प्रेरित किया मनोरम दृश्य के कुछ सुंदर भावों को पन्नों पर अंकित करने का, वही आपके समक्ष लेखनी के माध्यम से अभिव्यक्त कर रही हूँ।Continue Reading