पारलौकिक प्रेम मुझसे प्रेम करना देह से ऊपर मेरे कोमल मन की है कहानी अबीर कुमकुम इंद्रधनुष सी सजी ये रंगत है जा़फरानी। हर सुबह सूरज की लालिमा चूमती मेरे गाल बिखेरती अपनी किरणें रंग देती मुझे भी पीले लाल। ये पत्ते ये शाखें और टहनियां झूम झूम कर प्रेमContinue Reading

कोरोना ने एक दिन मुझे इतना डरा दिया कि रात सोते हुए को मुझे जगा दिया क्या मृत्यु इतनी नजदीक खड़ी है जैसे बाजूवाली की खिड़की खुली है। डर से क्या ऊपर निकल पाऊँगी सामान्य जीवन क्या वापस जी पाऊँगी डर कि लहर दौड़ने लगी थी मन में मृत्यु केContinue Reading

गिर कर थपेड़े वक़्त के खाती रही हूँ मैं फिर से चलने का साहस बढ़ाती रही हूँ मैं मंज़िल की ओर निरंतर जाती रही हूँ मैं हर पल हर दिन नई ऊर्जा लाती रही हूँ मैं। आत्मबल से पूरित हो जाए मेरा पूरा जीवन उत्साह उमंग आनंदित उल्लासपूर्ण हो मेराContinue Reading