मैं थकी मांदी लौटी अपने घर बाहें पसारे बेटी खड़ी द्वार पर दौड़ कर गई रसोई घर लेकर आई एक गिलास पानी पिलाया और कहा तुम थकी हो मेरी माँ थोड़ी देर बैठो मेरे पास बताओ तुम्हारे दफ़्तर में क्या हुआ आज ख़ास कुछ देर गुफ़्तगू हुई मन हो गयाContinue Reading

प्रशंसा के मीठे बोल होते बड़े अनमोल। प्रशंसा मानव की अभिलाषा सुन्दर जीवन की परिभाषा। दूर होती निराशा मन में जगती आशा। सच्ची प्रशंसा हृदय लुभाती हर मन का उत्साह जगाती। प्रशंसा सफलता का सोपान बच्चों का होता उत्तम निर्माण। खेल कूद हो या पढ़ाई प्रशंसा से बढ़ती अच्छाई। प्रफुल्लितContinue Reading

शक्ति जीवन की ऊर्जा सहयोग हो या प्रतिस्पर्धा दृढ़ अनुकूल विचारों से बढ़ती हमारी क्षमता और योग्यता। मन में शक्ति का वास ग़ज़ब का होता आभास काल चक्र का पहिया भी हो जाता इसका दास। शिव शक्ति प्रकृति के आधार दिव्य हूणों के अद्भुत भंडार जगत मूल के दोनों तारणहारContinue Reading

कोरोना ने सिखाया शिष्टाचार एक दूजे को करते नमस्कार बड़ो का सम्मान छोटों से प्यार हमारी सभ्यता,संस्कृति और संस्कार। अमूल्य आभूषण व्यक्तित्व का श्रृंगार जब होता जीवन में शिष्टाचार उत्तम समाज का सुदृढ़ आधार सहयोग विनम्रता ममता उच्च विचार। निश्चल प्रेम सद्भावना सद्व्यवहार प्रथम सीख देता परिवार गुरु ज्ञान सेContinue Reading

बोली की मिठास से होती हमारी पहचान संतों ने बताया हमको बनता जीवन महान। हर सीख जो थी उनकी भूल गया देखो इंसान कड़वाहट से नष्ट किया भूत भविष्य और वर्तमान। बोली की तीखी मार तलवार से पैनी धार हृदय चीर करती घाव मन भरते दुख के भाव। कांव कांवContinue Reading

अमीरी का दंभ भरने वाले कहाँ है वो अमीर चंद पैसों के लिए जो बेच देते अपने ज़मीर आजमा कर देखो इन्हें बन जाएंगे वो फ़कीर। ग़रीब तब तक ही ग़रीब है जब तक कोसता अपना नसीब है मुफ़्त के राशन से होता लाचार ये मंजर कितना अज़ीब है आगContinue Reading

सर पर खुला आकाश पांव ज़मीं पर, ठंडे पवन के मस्त झोंके ,तन पर गिरती टप-टप बारिश की बूँदों ने रोम-रोम को पुलकित किया और प्रेरित किया मनोरम दृश्य के कुछ सुंदर भावों को पन्नों पर अंकित करने का, वही आपके समक्ष लेखनी के माध्यम से अभिव्यक्त कर रही हूँ।Continue Reading

जुनून कुछ कर दिखाने का अपने साहस से कुछ पाने का। दीवानगी इस कदर छाई है अपार ऊर्जा भर आई है। सपनों को नए पंख लगे हैं उड़ान भरने को मचल उठे हैं। जुनून ए इश्क़ हो या कुछ बनने की चाह आत्मविश्वास से मिलती राह। नींद नहीं मुझे आContinue Reading

तर्क और वितर्क करते-करते कब कुतर्क से ग्रसित हुए गंवा दिए अपना अमूल्य जीवन नहीं हम विकसित हुए हठ असंयम अनर्गल बातों से ख़ुद की ऊर्जा को नष्ट किया माना बनाया स्वयँ को विजेता अहंकार मूर्खता से पथ भ्रष्ट किया। कुतर्क को क्यों देते हैं हम तर्क भ्रम के बीमारोंContinue Reading

कभी जहर खाकर तो कभी फंदा लगाकर कभी ऊंचाई से गिरकर तो कभी खुद को जलाकर क्यों करते हो आत्महत्या! मरने का इतना साहस है तुममें तो जिंदा रहने की कोशिश कर जाते नई ताक़त नई शक्ति लगाकर जीने की मिशाल बन दिखाते। कमज़ोर तन के मजबूत इरादे देख जीवनContinue Reading