बोली की मिठास से होती हमारी पहचान संतों ने बताया हमको बनता जीवन महान। हर सीख जो थी उनकी भूल गया देखो इंसान कड़वाहट से नष्ट किया भूत भविष्य और वर्तमान। बोली की तीखी मार तलवार से पैनी धार हृदय चीर करती घाव मन भरते दुख के भाव। कांव कांवContinue Reading

अमीरी का दंभ भरने वाले कहाँ है वो अमीर चंद पैसों के लिए जो बेच देते अपने ज़मीर आजमा कर देखो इन्हें बन जाएंगे वो फ़कीर। ग़रीब तब तक ही ग़रीब है जब तक कोसता अपना नसीब है मुफ़्त के राशन से होता लाचार ये मंजर कितना अज़ीब है आगContinue Reading

सर पर खुला आकाश पांव ज़मीं पर, ठंडे पवन के मस्त झोंके ,तन पर गिरती टप-टप बारिश की बूँदों ने रोम-रोम को पुलकित किया और प्रेरित किया मनोरम दृश्य के कुछ सुंदर भावों को पन्नों पर अंकित करने का, वही आपके समक्ष लेखनी के माध्यम से अभिव्यक्त कर रही हूँ।Continue Reading

योगा योगी योग भगाए सारे रोग स्वस्थ रखे तन मन को बनाए हम को निरोग। चिंता को दूर भगाए चुस्ती फुर्ती तन में लाए अद्भुत शक्ति जगाए आओ इसका लाभ उठाए। यह भारत की प्राचीन संस्कृति इतिहास बहुत पुराना है संत ऋषियों की दी विरासत सजगता से निभाना है। योगContinue Reading

मैं भारत माता साक्षात् तुम्हारे समक्ष हूँ हृदय शूल वेदना से, आकुल व्यथित प्रत्यक्ष हूँ। मेरे वीर बेटों को चीनी ने मार दिया मेरी छाती पर दी गहरी चोट और वार किया मेरे अंगों के टुकड़े देख कर क्या तुममें अब भी अगन नहीं ज्वलित होती अब और धीर नहींContinue Reading

तर्क और वितर्क करते-करते कब कुतर्क से ग्रसित हुए गंवा दिए अपना अमूल्य जीवन नहीं हम विकसित हुए हठ असंयम अनर्गल बातों से ख़ुद की ऊर्जा को नष्ट किया माना बनाया स्वयँ को विजेता अहंकार मूर्खता से पथ भ्रष्ट किया। कुतर्क को क्यों देते हैं हम तर्क भ्रम के बीमारोंContinue Reading

कभी जहर खाकर तो कभी फंदा लगाकर कभी ऊंचाई से गिरकर तो कभी खुद को जलाकर क्यों करते हो आत्महत्या! मरने का इतना साहस है तुममें तो जिंदा रहने की कोशिश कर जाते नई ताक़त नई शक्ति लगाकर जीने की मिशाल बन दिखाते। कमज़ोर तन के मजबूत इरादे देख जीवनContinue Reading

कौन से जीवन का कसूर भाग्य क्यूँ हुआ मजबूर संसार चक्र है नासूर बाल मजदूर कभी बेचता गुब्बारे कभी बेचता पतंग बेहाल फटेहाल जिन्दगी है ख़ुद से ही तंग छोटू दो कप चाय लाना रिश्ता इन शब्दों से बड़ा पुराना नन्हें हाथों से जूठे बर्तन धीरे-धीरे होता परिवर्तन गरीबी शोषणContinue Reading

कोरोना ने एक दिन मुझे इतना डरा दिया कि रात सोते हुए को मुझे जगा दिया क्या मृत्यु इतनी नजदीक खड़ी है जैसे बाजूवाली की खिड़की खुली है। डर से क्या ऊपर निकल पाऊँगी सामान्य जीवन क्या वापस जी पाऊँगी डर कि लहर दौड़ने लगी थी मन में मृत्यु केContinue Reading

गिर कर थपेड़े वक़्त के खाती रही हूँ मैं फिर से चलने का साहस बढ़ाती रही हूँ मैं मंज़िल की ओर निरंतर जाती रही हूँ मैं हर पल हर दिन नई ऊर्जा लाती रही हूँ मैं। आत्मबल से पूरित हो जाए मेरा पूरा जीवन उत्साह उमंग आनंदित उल्लासपूर्ण हो मेराContinue Reading