आत्महत्या

कभी जहर खाकर तो कभी फंदा लगाकर
कभी ऊंचाई से गिरकर तो कभी खुद को जलाकर
क्यों करते हो आत्महत्या!

मरने का इतना साहस है तुममें तो
जिंदा रहने की कोशिश कर जाते 
नई ताक़त नई शक्ति लगाकर 
जीने की मिशाल बन दिखाते। 

कमज़ोर तन के मजबूत इरादे 
देख जीवन में कितने लोग हैं आधे 
किसी के पाँव नहीं है कोई है बिना हाथ 
हर विषमता से करते वो आत्मसात्।

हालातों से न घबराते है
न वक्त से ही वो हारते हैं 
मरने वालों को कायर कहती दूनियांँ
जो जीते हैं वही तो इतिहास रचाते है। 

बंद दरवाजों के पीछे क्या थी मजबूरी 
हंसता चेहरा खामोश जुबां ने क्यों ली सबसे दूरी 
भीड़ में हुआ तन्हा जीवन को मिटा दिया
जाते-जाते न लिखा खत भी सबको रुला दिया।

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