कुछ  तो कहो ये दीवारें भी अब कहने लगी है  अकेली तन्हा पथराई सिमटी सी रहने लगी है   कितने  बरस  बीते हैं  उसके  आने की आस में  ज़र्र-ज़र्र टूटकर ज़मी पर रोज़ बिखरने लगी है।

धरती माता से है गहरा नाता आओ हम सब सम्मान करे प्रदूषण ख़त्म हो पृथ्वी हित में  स्वच्छ ऊर्जा का आह्वान करे।

सोना उगले अपनी माटी चहुं   ओर खुशहाली   हो वृक्षारोपण हमको  करना     धरा पर सुंदर हरियाली हो। 

रात की तन्हाई बना देती है  मुझे आवारा नापता हूँ मैं शहर की हर गली हर चौबारा रोशनी में  नहाई सड़कें भी  लगे बुझी सी ठोकरें खाता फिरूँ दर-ब-दर मारा-मारा। गुम हूँ आवारगी  में मेरा कोई ठिकाना नहीं बेवफ़ाई  में खाई चोट किसी  ने जाना नहीं कुछ अफ़वाह बेवजह बदनामContinue Reading

कुछ बातें लिखी हुई मेरे मन की, वो पुराने अखबार ले आओ बेपनाह मोहब्बत थी हमें कभी,वो पुराने एतबार ले आओ  यादों में बिखरे हुए कई अनकहे वादे, लफ्ज़ और ज़ज्बात  मेरी दिलकश आँखों में फिर से, वो पुराने खुमार ले आओ।

खाटू के दरबार में, भक्तों की जयकार। महके इत्र गुलाब से, श्याम धणी सरकार।। भक्तों की जयकार से,गूंज उठा दरबार। महके इत्र गुलाब से,कलयुग के दातार।।

पलक  झपकते  ही क्या कुछ नहीं बदल गया  एक तेरे चले जाने से हर चेहरा ही बदल गया  ग़म  उठा ले आया  कहाँ से  हवा  का  झोंका  धरती तो  बदली ही आसमाँ भी बदल गया।

सावन में भीगे हम भी सावन में भीगे तुम भी आग लगी सीना दहका आँचल भीगा सा मन का। मोहक बौछारें बरसे मादक हो त्यौं-त्यौं हरषे पायल के गूँजें घुँघरा प्रीतम को छू के बिखरा। पागल बूंदे नाच रही कोमल गंगा धार बही अंचल से गीला झरना चुंबन से अंकोंContinue Reading

वो भूली दास्ताँ वो बीते दिन पुराने लो याद आयें हैं फिर से मुझे रुलाने दिल में जले चिराग़ रोशन ज़माना सारा झूठी प्यार क़िताब ग़मों से दिल है हारा मन के उम्मीद पर चले एक शमा जलाने वो भूली दास्ताँ वो बिसरे से तराने टूटी हुई कश्ती बहती नदीContinue Reading

सोचिए किस किसान का बेटा किसान है! नए दौर की कब बनेगी यहाँ पर पहचान है परिवर्तन को स्वीकार करना होता मुश्किल आंदोलन ख़त्म पर अब भी अधूरी मंज़िल आलू प्याज़ टमाटर सड़कों पर फेंके जाते ग़रीब बेरोज़गार भूख से पीड़ित मर जाते राजनीति में उलझ गई किसानों की कश्तीContinue Reading