बाबा अब मैं बड़ी हो गई हूँ मेरे हाथों को पीले करवा दो जीवन की सबसे बड़ी खुशी एक नई पहचान दिलवा दो। गणपति का शुभ वंदन करके पूजा अर्चना सुमिरन करवा दो बाबा अब मैं बड़ी हो गई हूँ मेरे हाथों को पीला करवा दो। कच्ची हरी हरी पत्तियाँContinue Reading

ख़्वाहिशों की तपिश चाँद की चाँदनी अधूरी क्यूँ है तड़प उठती मेरे सीने में दिलों की प्यास अधूरी क्यूँ है बुलबुले उठ रहे है स्वप्न जाल ये रात अधूरी क्यूँ है लबों पे ख़ामोशी घायल मन की बात अधूरी क्यूँ है चूड़ियों की खनक पायल की झंकार अधूरी क्यूँ हैContinue Reading

जिंदगी के धूप में बड़ी तपन है दिल के अंधेरों में बढ़ी घुटन है  वो आँधियों की तरह  उड़ता रहा  मेरे हर साँसों में  शोर करता रहा  उफ्फ ये आँधी के साथ  गम की बरसात भी  आने लगी है  मेरे मन को बड़ा  सताने लगी है माना तेरे जाने काContinue Reading

वैक्सीन नहीं है तो क्या हुआ रोज न जाने कितने मर रहे हैं संवदेना जता हम चल रहे हैं हौसलों से हल निकल रहे हैं भागदौड़ में भी संभल रहे हैं। दवा नहीं पास तो क्या हुआ दुआ से हर लम्हें संवर रहे हैं मास्क से सब दूरी बना रहेContinue Reading

कल का दिन मेरा बड़ा प्यारा था अठखेलियों का अद्भुत नज़ारा था सड़क पर पैदल मैं चल रही थी आँखें मेरी ताक झाँक कर रही थी तभी नज़र आए मुझे वो तीन बंदर गांधीजी की नव प्रतिमा के ऊपर अठखेलियाँ कर वो सब नाच रहे थे मन की बात बयांContinue Reading

ज़माने की तल्खियों से चित्कार करता मन सौ शब्दों के जाल बुन प्रतिकार करता मन ख़ामोशी कहती मन से आज मत उलझ किसी से…उलझेंगे… फिर कभी **************************** सफ़र में थी बड़ी मौज मस्ती गाना बजाना एक दूजे संग कभी ताश कभी लुडो खेलना स्टेशन आया सब गले मिले खुश होकरContinue Reading

कवि की काव्य कृति छंद लय बद्ध रीति  साहित्य की अविरल रस गंगा अद्भुत मीठी  मनोभावों की मोहिनी कलात्मक अभिव्यक्ति  हृदय तलब सुखद सुमधुर प्राचीन संस्कृति। कभी काव्य में कोमल सरस भाव बताता  कभी व्यंग्य से तीखे शब्द भरे बाण चलाता ओजस्वी काव्य से राष्ट्र नव चेतना जगाता  श्रृंगार हास्यContinue Reading

हमसफ़र ना सही हमदर्द बना लो पाँव के छालों पर मरहम लगा दो माना राह पर साथ न चल पाओगे सुख दुख बाँट कर जीना सीखा दो। किस्मत ने खेला बड़ा अज़ीब खेल मुकम्मल नहीं हुआ हमारा सफ़र तन्हाई से लिपट गया पूरा आसमाँ उदासी से भर गई हमारी प्रेमContinue Reading

भारत की राजभाषा हिंदी। हम सबकी मातृभाषा हिंदी। हिन्दुस्तान की पवित्र डोर हिंदी। आत्मा की सुदृढ़ जोड़ हिंदी। उन्नत शीश की बिंदी हिंदी। प्रगति का प्रतिबिंब हिंदी। संस्कृति की पहचान हिंदी। संस्कारों का सम्मान हिंदी। स्नेह प्रेम प्रीत सद्भाव हिंदी। प्रधानमंत्री मन की बात हिंदी। बोलचाल की भाषा हिंदी। हरContinue Reading

ज्ञान मुद्रा में बैठ कर आँखे मूँद कर महसूस किया जीवन बहुत अद्भुत है। परमात्मा की सेवा कर दैवीय भक्ति कर महसूस किया जीवन बहुत अद्भुत है। स्वयँ से प्रेम कर खुद को समर्पित कर महसूस किया जीवन बहुत अद्भुत है। संघर्षों से टकरा कर उसको हरा कर महसूस कियाContinue Reading