भारत के युग पुरुष श्री रबीन्द्रनाथ टैगोर मेरी कलम सृजन कर हुई आत्म विभोर 7 मई को कोलकाता शहर में हुआ जन्म अद्भुत प्रतिभा के धनी साहित्य धर्म कर्म पिता देवेन्द्र नाथ टैगोर माता शारदा देवी तेरह भाई बहन मृणालिनी पत्नी सस्नेही लेखक चित्रकार महान थे वो साहित्यकार देशवासियों कोContinue Reading

प्रेम में क्या हार हो क्या जीत ये परमात्मा का सुमधुर गीत अंतरात्मा को महसूस करना यहीं जगत की है सच्ची रीत जीत से ख़ुशी हो हार से विकल समभाव से जीवन होता सफ़ल हार जीत भुलकर ऊपर उठना कीचड़ में खिल जाता है कमल बस पा लेना ही जीतContinue Reading

आज म्हारे घर गणगौर माता आई है पूजा करण सारी सखियाँ संग लाई है माथे पर चुन्दड़ लाल सजाई है सगला रे मन में खुशियां खूब छाई है कुमकुम टीका रोली चंदन हाथ जोड़ करें सब शुभ वंदन गीत सुरों री लहरी सजाई है चंग री थाप सू मन हर्षायीContinue Reading

बचपन से पचपन के सफ़र में सच्चा मित्र बनकर साथ दिया मेरे दिल में भरे ढेरों सवालों का पल – पल सही तूने जवाब दिया भटके मन की व्यथा को कम कर मन को एकाग्र शांति सुकून दिया कभी मुझे हँसाकर कभी रुलाकर सशक्त शिक्षा प्रेरणा सद्गुण दिया पुस्तक लेContinue Reading

ख़ुद को तराश लीजिये जिदंगी बेहतर महसूस होने लगेगी बिखरे मोती को जोड़ लीजिये खूबसूरत माला सजने लगेगी विसर्जन करो मन विकारों का नव चेतना में जाग्रति आएगी चिराग़ जला कर रख लीजिये स्याह रात धुंधली हो जाएगी। दूसरों की छोड़िए ज़नाब स्वयं को जीने का आनंद आएगा अहंकार सेContinue Reading

जब से तुम आई मेरी जिंदगी में मानो सपनों का संसार मिल गया एक तेरे साथ ने दिया वज़ूद मुझे मेरी खुशियो का अंबार लग गया मेरा प्यार मेरी बहार ए जानेमन खुशबु से मेरा चमन महक गया तेरे इर्द गिर्द मंडराता भंवर बन शुभ्र पुष्प सुंदर बाग सज गयाContinue Reading

टेसु से सजा महकता बाबुल का आँगन फागुनी हवा में खुशबु चहुँ ओर छाई है सितार वाद्य संग हो रहा शहनाई वादन साजन से प्रेम मिलन रुत देखो आई है माँ की आँखे नम चेहरे पर खुशी लेकर कलेजे के टुकड़े को दे रही वो विदाई है लाड प्यार सेContinue Reading

पुस की अंधेरी रात सर्द हवाएं यादों में लेखक मुंशी प्रेमचंद इंसान और पशु प्रेम का भाव सजाती ये कथा पहली पसंद कहानी का नायक हल्कू और जबरू कुत्ते के रात्रि का संघर्ष मार्मिक कथा काव्य में रूपांतरित कर हुआ हृदय को स्पर्श पैसों की तंगी जमीनदार की धौंस जमाContinue Reading

परिंदों को पंख मिले गली मोहल्लों को मिली पहचान सचिन ने जब बल्ला उठाया राष्ट्र का बढ़ाया सम्मान मिट्टी से सने हाथ-पैरों ने लिखा इक नया इतिहास कहानी किस्से सपने बचपन के जीवित एहसास खेल-कूद पढ़ाई-लिखाई निश्चल बाल सुलभ मन भूल-भुलैया बंद कमरा न जाने क्यूँ खोता बचपन सूरज सेContinue Reading

हर उम्र के दराज़ पर एक नया रूप धरती कभी बेटी कभी बहन बन जीवन में रहती अपने स्नेह प्रेम से घर आँगन को महकाती कभी पत्नी कभी माँ बन रिश्तों को सजाती नारी जीवन संयम धैर्य सहनशीलता से चला अपनों को एक सूत्र में पिरो कर रखती कला अंतर्मनContinue Reading