जब से तुम आई मेरी जिंदगी में मानो सपनों का संसार मिल गया एक तेरे साथ ने दिया वज़ूद मुझे मेरी खुशियो का अंबार लग गया मेरा प्यार मेरी बहार ए जानेमन खुशबु से मेरा चमन महक गया तेरे इर्द गिर्द मंडराता भंवर बन शुभ्र पुष्प सुंदर बाग सज गयाContinue Reading

टेसु से सजा महकता बाबुल का आँगन फागुनी हवा में खुशबु चहुँ ओर छाई है सितार वाद्य संग हो रहा शहनाई वादन साजन से प्रेम मिलन रुत देखो आई है माँ की आँखे नम चेहरे पर खुशी लेकर कलेजे के टुकड़े को दे रही वो विदाई है लाड प्यार सेContinue Reading

पुस की अंधेरी रात सर्द हवाएं यादों में लेखक मुंशी प्रेमचंद इंसान और पशु प्रेम का भाव सजाती ये कथा पहली पसंद कहानी का नायक हल्कू और जबरू कुत्ते के रात्रि का संघर्ष मार्मिक कथा काव्य में रूपांतरित कर हुआ हृदय को स्पर्श पैसों की तंगी जमीनदार की धौंस जमाContinue Reading

परिंदों को पंख मिले गली मोहल्लों को मिली पहचान सचिन ने जब बल्ला उठाया राष्ट्र का बढ़ाया सम्मान मिट्टी से सने हाथ-पैरों ने लिखा इक नया इतिहास कहानी किस्से सपने बचपन के जीवित एहसास खेल-कूद पढ़ाई-लिखाई निश्चल बाल सुलभ मन भूल-भुलैया बंद कमरा न जाने क्यूँ खोता बचपन सूरज सेContinue Reading

हर उम्र के दराज़ पर एक नया रूप धरती कभी बेटी कभी बहन बन जीवन में रहती अपने स्नेह प्रेम से घर आँगन को महकाती कभी पत्नी कभी माँ बन रिश्तों को सजाती नारी जीवन संयम धैर्य सहनशीलता से चला अपनों को एक सूत्र में पिरो कर रखती कला अंतर्मनContinue Reading

ख्वाहिशें दम तोड़ रही है उम्मींद का दामन बचा नहीं है ज़िंदगी दर्द जोड़ रही है खुशियों का आलम सजा नहीं है मुझ को नहीं हो रहा है यक़ीन क्यूँ दिल में उमस-सी तारी है बेबसी से गुजर रहा है दिन अश्कों से रात अक्सर भारी है। भीड़ में भीContinue Reading

सुख के साथी सब हैं दुख में कोई नहीं आता वो जिये या मरे सोचते लोग अपना क्या जाता सुख दुख जीवन के दो पहलू हर कोई जानता मुसीबत में साथ दे वही सच्चा साथी कहलाता काल चक्र का पहिया हर किसी को है सताता क्षण भर में जीवन काContinue Reading

जयपुर के पास भानगढ दुर्ग भुतहा स्थान जहां रात को कोई नहीं आता खण्डहर में बदली संरचना पहाड़ का सौंदर्य आकर्षण फिर भी पर्यटकों को खूब भाता जल के स्त्रोत बने मंदिर भी जीवंत हैं पर डर दिल में समाता साँप बिच्छु चमगादड़ जंगली जानवरों से भरा कौतुहल विषय बनाताContinue Reading

साहित्य समाज का दर्पण जीवन की है आलोचना सत्य शिव सुंदर से तर्पण लोक मंगल की कामना साहित्य हम सबकी प्रेरणा संस्कृति हमारी है पहचान अपनी लेखनी को सहेजना राष्ट्र की है आन बान शान समाज का कर मार्गदर्शन साहित्यकार जलाते मशाल चिराग़ आलोकित प्रदर्शन प्रतिबिंबित करते विशाल काग़ज परContinue Reading

ठिठुर ठिठुर कर रात जागती                भोर की आहट होने तक  बोझ गुलामी का कंधों पर               तुम ढ़ोते रहोगे कब तक।