धरती से अंतरिक्ष तक महिला जौहर दिखा रही कभी प्रधानमंत्री कभी विदेश मंत्री कभी रक्षा मंत्री बनकर देश की हर समस्या को सुलझा रही वित्तीय आर्थिक भौगोलिक राजनीतिक हो या बैंकिंग हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवा रही औरत नहीं सिर्फ भोग्य वस्तु वो बड़ा कमाल दिखा रही पुरुष प्रधानContinue Reading

अजीज़ मित्रों आज आपके लिए मित्रता दिवस पर हृदय के उद्गार…. प्रेम स्नेह से हृदय को तृप्त करते मेरे मित्र। हर सुख दुख में साथ निभाते मेरे मित्र। मन की बगिया को सराबोर करते मेरे मित्र। भ्रमित चित्त भटके को राह दिखाते मेरे मित्र। अश्रु बूँद देख मन को सहलातेContinue Reading

पड़ोसी ने मांगी दालचीनी मैंने कहा रोज रोज मांगते हो मुझसे आज नहीं दीनी। वो बोला क्यों होते हो नाराज हर सुख दुख का मैं ही साथी हूँ तेरा हमराज़। परिवार तेरा रहता दूर मैं ही हूँ तेरे जीवन का नूर कहने को मेरे भाई मत कर मुझको मज़बूर। आधीContinue Reading

एक सत्य – अत्यधिक आर्थिक तंगी चोरी, लूट खसोट, ठगी,छलावा,जालसाजी़ व डकैती को जन्म देती है। इससे उबरने के लिए एक दूसरे पर विश्वास करके काम देना चाहिए। एक छोटा सा वाक्या आप सभी से सांझा करती हूँ, कई वर्षों से एक इस्त्री करने वाला युवा धोबी  है, जिसने अपनीContinue Reading

हाथों में लगती मेहंदी बालों में सजता गज़रा माथे पर सोहती बिंदी खन खन करता कंगना। उफ्फ ये सोलह श्रृंगार औरत की खुबसूरती अपार दिल में होता खूब प्यार हरियाली तीज़ का त्यौहार। तीज़ के पूर्व होता सिंजा़रा यह दिन होता बड़ा प्यारा रिश्तों में घुलती मिठास महकता घर आँगणContinue Reading

तीव्र हवाऐं चीरती कानों को छीन लिया ज़िन्दगी का सुकून वृक्ष हिलता पत्ता पत्ता डर रहा तेज़ रफ़्तार से गिरता पड़ता सभंल रहा न जाने क्यूँ दौड़ रहे हैं सब ठहराव नहीं किसी में अब ख़्वाबों के मुकम्मल की आरज़ू में रुकेगा ये काफ़िला कब!

मैं थकी मांदी लौटी अपने घर बाहें पसारे बेटी खड़ी द्वार पर दौड़ कर गई रसोई घर लेकर आई एक गिलास पानी पिलाया और कहा तुम थकी हो मेरी माँ थोड़ी देर बैठो मेरे पास बताओ तुम्हारे दफ़्तर में क्या हुआ आज ख़ास कुछ देर गुफ़्तगू हुई मन हो गयाContinue Reading

प्रशंसा के मीठे बोल होते बड़े अनमोल। प्रशंसा मानव की अभिलाषा सुन्दर जीवन की परिभाषा। दूर होती निराशा मन में जगती आशा। सच्ची प्रशंसा हृदय लुभाती हर मन का उत्साह जगाती। प्रशंसा सफलता का सोपान बच्चों का होता उत्तम निर्माण। खेल कूद हो या पढ़ाई प्रशंसा से बढ़ती अच्छाई। प्रफुल्लितContinue Reading

एक छोटी सी कहानी – संगठन छह पौधे लगाए गये।माली सब को बराबरी से उन पौधों को सीच रहा था और देखते ही देखते सारे एक साथ बढ़ते गए। एक दिन बहुत तेज आँधी चली, पर कोई भी क्षतिग्रस्त नहीं हुआ, क्योंकि सब बराबर लंबाई और मजबूती के साथ खड़ेContinue Reading

शक्ति जीवन की ऊर्जा सहयोग हो या प्रतिस्पर्धा दृढ़ अनुकूल विचारों से बढ़ती हमारी क्षमता और योग्यता। मन में शक्ति का वास ग़ज़ब का होता आभास काल चक्र का पहिया भी हो जाता इसका दास। शिव शक्ति प्रकृति के आधार दिव्य हूणों के अद्भुत भंडार जगत मूल के दोनों तारणहारContinue Reading